किचन गार्डन में नहीं है गार्डन गार्डन! कृषि वैज्ञानिकों ने अपनाएं ये घरेलू सामान

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किचन गार्डन में नहीं है गार्डन गार्डन! कृषि वैज्ञानिकों ने अपनाएं ये घरेलू सामान

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किचन गार्डन टिप्स: आजकल रासायनिक खाद से मिट्टी और सेहत पर पड़ता है बुरा असर। ऐसे में देवघर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजन ओझा ने प्याज, नीम, खैनी से लेकर रसायन शास्त्र और खाद्य पदार्थों की अपील की है। इससे आपके गार्डन में एक भी कीड़े नहीं है।

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देवघर: आज के समय में किसान उपकरणों और अपने किचन गार्डन में भारी मात्रा में उत्पादन लेने की होड़ में रासायनिक खाद और रसायनों का उपयोग किया जा रहा है। आरंभ में फ़ासलों की गति से जनसंख्या में वृद्धि दिखाई देती है, लेकिन धीरे-धीरे इसका प्रभाव मिट्टी, व्यक्तियों और मनुष्यों की सेहत पर पड़ता है। रासायनिक औषधियों के अधिक उपयोग से मिट्टी की असाधारण क्षमता कम हो रही है और कई जगह खेत बंजर होने की स्थिति में पहुंच रहे हैं। वहीं, बाजार में मिलने वाली सागा-सब्जियों में भी लौंग की मात्रा आधी जा रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। ऐसे में अब किसान और लोग, जैविक खेती और घरेलू तरीकों से तैयार होने वाले जैविक खाद की ओर लौट रहे हैं।

जानें क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक

देवघर के कृषि वैज्ञानिक डाॅ. राजन ओझा ने लोकल 18 सेकिट में बात करते हुए कहा कि आप घर और आसपास आसानी से मिलने वाली नीम से बेहतरीन जैविक खाद और प्राकृतिक रसायन तैयार कर सकते हैं। इससे ना सिर्फ उपचार स्वस्थ रहते हैं, बल्कि मिट्टी की ताकत भी बनी रहती है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें अधिक खर्च भी नहीं होता है और छोटे किसान से लेकर घर में किचन गार्डन बनाने वाले भी इसे आसानी से अपना सकते हैं। उन्होंने बताया कि कई ऐसी घरेलू वस्तुएं होती हैं, जिनमें लोग बेकार समझकर काम देते हैं, लेकिन ये दवाएं अमृत के काम आती हैं।

नीम के पत्ते से बनाया जा सकता है जैविक खाद

डॉक्युमेंट्री में लिखा है कि प्याज का रसायन शास्त्र के लिए काफी अद्भुत होता है। अगर प्याज को पीसकर पानी में लगभग कुछ घंटे छोड़ दिया जाए और फिर उस पानी के इंजीनियर की मशीनरी पर काम किया जाए तो टेक्निकल में इंजीनियर के स्तर की संभावना काफी कम हो जाती है। इसका तेज़ गंध कई प्रकार के विकिरण कीड़ों को दूर रखने का काम करता है। इसी तरह नीम के दुकानदारों का उपयोग भी बहुत प्रभावशाली माना जाता है। नीम के मछुआरों को पानी में एक सप्ताह तक रहने के बाद उस पानी को अच्छा करने वाले प्रशिक्षकों पर पानी डालने से उनका धंधा समाप्त हो गया। नीम का बोथपन प्राकृतिक रसायन की तरह काम करता है और फार्मेसियों में रहने की संभावना भी कम होती है।

जैविक खाद के रूप में खेनी का उपयोग होता है

उन्होंने बताया कि सब्जी या खैनी के मसाले का उपयोग खेती और रसोई के बगीचे में भी किया जा सकता है। इसके लिए पानी में करीब 10 दिन तक खैनी के चॉकलेट को डुबोकर रखा जाता है। इसके बाद पानी को गुडकर टमाटर, बैंगन, काली मिर्च, भिन्डी, कद्दू, करेला जैसे मसालों पर बनाया जाता है। इससे फसल में कीड़े वाले दूर रहते हैं और उपचार स्वस्थ तरीके से बढ़ रहे हैं। साथ ही फ़सल की निर्मिति में भी अच्छी चीज़े देखने को मिलती है।

किसान घर में ही बना सकते हैं जैविक खाद

कृषि का कहना है कि यदि किसान धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे-धीरे रासायनिक रासायनिक खाद बनाने की जगह पर जाना शुरू कर रहे हैं, तो आने वाले समय में मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी और लोगों को भी शुद्ध और सुरक्षित रूप से पौधे मिलेंगे। आज जरूरत है इस बात की कि किसान कम खर्च में प्राकृतिक खेती की ओरस्टेप और अपने विचारों के साथ-साथ किचन गार्डन को भी सुरक्षित रखें।

लेखक के बारे में

बृजेन्द्र प्रताप सिंह

बृजेन्द्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 प्राचीन से सक्रिय हैं। मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें

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