Petrol Diesel Price: कच्चे तेल में गिरावट के बावजूद पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं होंगे सस्ते? जानें केंद्रीय मंत्री का बड़ा बयान
Petrol Diesel Price: अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल में गिरावट के बावजूद कीमतें क्यों नहीं घट रहीं?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल ही में काफी गिरावट आई है, लेकिन भारत में petrol diesel price में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इससे आम जनता के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर जब कच्चा तेल सस्ता हो रहा है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं घट रहे हैं?
केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने इस सवाल का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर भारत में petrol diesel price पर तुरंत नहीं दिखेगा . इसके पीछे कई कारण हैं, जिनमें सस्ते तेल को भारत पहुंचने में लगने वाला समय, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की भीड़ और पिछले नुकसान की भरपाई शामिल है।
केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में साफ किया कि भारत में petrol diesel price तुरंत कम नहीं होंगे . उन्होंने बताया कि हालिया बढ़ोतरी को सिर्फ इसलिए वापस नहीं लिया जा सकता क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कम हुई हैं .
गोपी ने कहा, “इसमें समय लगेगा क्योंकि सस्ते कच्चे तेल को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते भारत लाया जाएगा, जहां अभी जहाजों का बहुत अधिक ट्रैफिक है। इसलिए हालात को सामान्य होने में समय लगेगा” . यही वजह है कि 18 जून 2026 को भी petrol diesel price में कोई बदलाव नहीं आया और दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर तथा डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रहा .
Petrol Diesel Price: 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान क्यों हुआ?
मंत्री सुरेश गोपी ने यह भी बताया कि इस साल की शुरुआत में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से तेल कंपनियों पर काफी बुरा असर पड़ा था . सरकार ने उपभोक्ताओं को पूरे असर से बचाने के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से पैदा हुए बोझ का एक बड़ा हिस्सा खुद उठाया।
गोपी ने कहा कि इस असर को खुद झेलने से केंद्र सरकार को लगभग 12,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ . उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राज्य ने ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों पर कम एक्साइज ड्यूटी लगाकर अपना राजस्व कम नहीं किया . अब केंद्र सरकार और तेल कंपनियों को इस नुकसान की भरपाई करनी है, इसलिए petrol diesel price पर तुरंत राहत की संभावना कम है।
कच्चे तेल की कीमतें कितनी गिरीं?
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 1.64 प्रतिशत टूटकर लगभग 78 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 2 प्रतिशत की कमी के साथ लगभग 75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
इससे पहले, 15 जून 2026 को ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल था . इस गिरावट से तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को कुछ राहत मिली है। पेट्रोल पर अंडर-रिकवरी (घाटा) 6 रुपये प्रति लीटर से घटकर 3 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल पर यह 30 रुपये से घटकर 27 रुपये प्रति लीटर रह गई है .
Petrol Diesel Price कैसे तय होती है?
भारत में petrol diesel price सिर्फ कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं करती। इसमें कई अन्य कारक शामिल होते हैं:
- रिफाइनिंग लागत
- परिवहन शुल्क (फ्रेट)
- केंद्र सरकार का एक्साइज ड्यूटी
- राज्य सरकारों का वैट (VAT)
- डीलर कमीशन
ये सभी कारक मिलकर अंतिम petrol diesel price तय करते हैं . यही वजह है कि अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग-अलग होते हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये है, तो मुंबई में यह 111.18 रुपये , हैदराबाद में 115.69 रुपये और चेन्नई में 107.88 रुपये प्रति लीटर है .
क्या भविष्य में पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है?
मंत्री सुरेश गोपी ने यह तो स्पष्ट किया कि petrol diesel price तुरंत कम नहीं होंगे, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार कम बनी रहती हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते सप्लाई सामान्य हो जाती है, तो भविष्य में राहत मिल सकती है .
हालांकि, पश्चिम एशिया की स्थिति अभी भी अनिश्चित है और विशेषज्ञों का मानना है कि petrol diesel price में किसी भी तरह की कमी के लिए कुछ समय और इंतजार करना पड़ सकता है . तब तक उपभोक्ताओं को मौजूदा दरों पर ही पेट्रोल-डीजल का उपयोग करना होगा।
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