Sidhu Kanhu Jayanti: CM Hemant Soren ने हूल दिवस पर अमर वीरों को दी श्रद्धांजलि, कहा- क्रांति की आग कभी नहीं बुझती

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Sidhu Kanhu Jayanti: CM Hemant Soren ने हूल दिवस पर अमर वीरों को दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने 30 जून 2026 को हूल दिवस के अवसर पर मोरहाबादी, रांची स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर हूल विद्रोह के महानायक अमर वीर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की । इस अवसर पर विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन भी उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि Sidhu Kanhu Jayanti (सिदो-कान्हू जयंती) का यह दिन ऐतिहासिक है। यह वह दिन है जब शोषण के विरुद्ध जबरदस्त आवाज उठाई गई थी। उन्होंने कहा कि देश में शोषण से निकलने के लिए जब कोई रास्ता नहीं दिख रहा था, उस समय आदिवासी समाज के वीरों ने शोषण के विरुद्ध मोर्चा खोला।


क्या है हूल दिवस और क्यों मनाया जाता है Sidhu Kanhu Jayanti?

हर साल 30 जून को Hul Diwas (हूल दिवस) मनाया जाता है, जो 1855 के संथाल विद्रोह (सन्थाल हूल) की याद में समर्पित है । इस दिन आदिवासी वीरों सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने अंग्रेजी शासन और साहूकारों के शोषण के खिलाफ क्रांति का बिगुल फूंका था 

Sidhu Kanhu Jayanti (सिदो-कान्हू जयंती) 11 अप्रैल को भी मनाई जाती है, जब 1815 में सिदो मुर्मू का जन्म भोगनाडीह (साहिबगंज) में हुआ था । 30 जून का हूल दिवस विशेष रूप से 1855 में शुरू हुए संथाल विद्रोह का प्रतीक है, जिसे कई इतिहासकार भारत का पहला संगठित स्वतंत्रता संग्राम मानते हैं 


Sidhu Kanhu Jayanti पर CM Hemant Soren का संबोधन

मुख्यमंत्री ने Sidhu Kanhu Jayanti (सिदो-कान्हू जयंती) के अवसर पर कहा कि “क्रांति की आग बुझती नहीं है, बुझाई भी नहीं जा सकती। क्रांति की चिंगारी सदैव जलती है।”

उन्होंने कहा कि आज भी कहीं-ना-कहीं क्रांति और संघर्ष कमजोर वर्गों के शोषण के विरुद्ध प्रतिरोध से ही शुरू होता है। Sidhu Kanhu Jayanti (सिदो-कान्हू जयंती) के इस पावन अवसर पर सीएम ने कहा कि इन वीर सपूतों की बदौलत ही झारखंड को ‘वीरों की धरती’ कहा जाता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सिदो-कान्हू ने परिणाम की चिंता किए बिना शोषण के विरुद्ध मोर्चा खोला था, और यही उनकी महानता है। उन्होंने कहा कि Sidhu Kanhu Jayanti (सिदो-कान्हू जयंती) हमें उनके आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देती है।


1855 का संथाल विद्रोह (Santhal Hul): ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

30 जून 1855 को सिदो-कान्हू ने भोगनाडीह से संथाल विद्रोह (सन्थाल हूल) की शुरुआत की थी । इस विद्रोह में 400 गांवों के 50,000 से अधिक आदिवासियों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ हथियार उठाए 

Sidhu Kanhu Jayanti (सिदो-कान्हू जयंती) और हूल दिवस पर सिदो-कान्हू के जन्मस्थान भोगनाडीह (साहिबगंज) में हर साल हजारों लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं । इस विद्रोह में 20,000 से अधिक क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दी 

मुख्यमंत्री ने Sidhu Kanhu Jayanti (सिदो-कान्हू जयंती) के इस अवसर पर कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और वीरांगना फूलो-झानो देश के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

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