धान का बूढ़ा बिचड़ा कम कर सकते हैं निर्माण, स्टैगर विधि से डेकोक, बचगी मौसम की मार
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पलामू धान की खेती की तैयारी: एक सलाह के साथ ही धान की खेती की तैयारी पर जोर दिया गया है। इस समय धान का बिचड़ा तैयार करना सबसे अच्छा समय है। इस बारे में कृषि विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश शाह का कहना है कि स्टेगर विधि से बिचड़ा तैयार करो ताकि आटे का समय वो बहुत पुराना न हो। पुराना बिचड़ा जिसे बूढ़ा कहते हैं, रोपने से धान अच्छा नहीं होता।
पलामू. पलामू में डीआइए की मान्यता के बाद साकीत में साझीदारी का कारोबार शुरू हो गया है, जहां से धान की खेती की समाप्ति हो चुकी है। कृषि विशेषज्ञ डाॅ. नीतीश शाह ने कहा था कि वर्तमान समय में धान का बिचड़ा (नर्सरी) तैयार करना सबसे उपयुक्त है। पलामू के जिन किसानों ने अब तक गठबंधन नहीं किया है, वे खेत में तैयार कर धान का बिचड़ा लगा सकते हैं। हालाँकि, इस वर्ष अल नीनो के प्रभाव के कारण वर्षा से सामान्य से कम जीवन स्तर का खतरा बना हुआ है। ऐसे में किसानों को वैज्ञानिक एवं तकनीकी पद्धति की बजाय पारंपरिक तरीकों की सलाह दी जा रही है, ताकि मौसम की अनिश्चितता का असर कम हो।
इस विधि से तैयार करें बिचड़ा
उन्होंने कहा कि अगर किसानों के पास सिंचाई के लिए पर्याप्त साधन नहीं है और वह पूरे खेत के लिए बिचड़ा तैयार कर लेते हैं तो बारिश में देरी हो सकती है। बूढ़ा बिचड़ा खेत में बाद में अच्छी वृद्धि नहीं कर पाता, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। इसलिए किसानों को स्टेगर (चरणबद्ध) विधि से बिचड़ा तैयार करना चाहिए।
इस विधि से तैयार करें बिचड़ा
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी किसान के पास करीब 15 कट्ठे में धान की खेती है, तो वह पहले पांच कट्ठे के लिए बीज गिराने के बजाय एक साथ पूरे क्षेत्र का बिचड़ा तैयार कर ले. इसके पांच से 10 दिन बाद अगले पांच कत्थे के लिए क्लास तैयार करें और फिर लगभग एक सप्ताह बाद शेष पांच कत्थे का बिचड़ा तैयार करें। इस तकनीक से अलग-अलग समय पर तैयार होने वाली सामूहिकता उपलब्ध रहेगी और बारिश के अनुसार उपयुक्त उम्र का बिचड़ा मिलेगा। इस उत्पाद में भी पॉडकास्ट होगा और सीज़न का जोखिम कम होगा।
किसान भाई तैयार करें समय खेत में अच्छी तरह से साडी हुई कम्पोस्ट खाद का प्रयोग अवश्य करें। कम्पोस्ट मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ रिस्टोरेटिव को भी मजबूत बनाया गया है। इससे बिचड़ा उखड़ने के दौरान कंपनी के निर्माण की संभावना कम हो जाती है और बीमारी के बाद उपचार तेजी से स्थापित हो जाते हैं।
मूल्य निर्धारण भी जरूरी
किराना नियंत्रण के लिए भी शुरुआत से ही सावधानी बरतनी जरूरी है। प्रति लीटर पानी में 2 मिली प्रीटिलाक्लोर (प्रेटिलाक्लोर) या प्रति लीटर पानी में 5 मिली पेंडिमेथालिन (पेंडिमेथालिन) मिलाकर मिलाया जा सकता है। इससे चावल का प्रकोप कम होगा और धान के प्रबंधन को पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक सीज़ को वैज्ञानिक तरीकों से तैयार करके ही किसानों को बेहतर और सुरक्षित उत्पादन दिया जा सकता है।
लेखक के बारे में
रिचमंड यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट। पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और एबीपी न्यूज से हुआ न्यूज18 हिंदी तक पहुंचा। पर्यटक और देश की …और पढ़ें














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