झारखंड स्थापना दिवस पर जनउमंग: ‘झारखंड यात्रा’ में सीएम मिशेल सोरेन ने बजाया ढोल-नगाड़ा, मोरहाबादी में संगीतकार राव ने बांधा समा – रांची समाचार
झारखंड की राजधानी रांची में 25वीं वर्षगांठ पर भव्य “झारखंड यात्रा” का भव्य आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री रसेल सोरेन जैप-1 ग्राउंड, डोरंडा सेंक्शन इस विशाल जतरा में पारंपरिक ढोल-नगाड़ा बजाते शामिल हुए।
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सीएम राहुल गांधी इस विशाल जतरा में पारंपरिक ढोल-नगाड़ा बजाते हुए शामिल हुए।
उन्होंने स्थानीय लोक कलाकारों की यात्रा को आबाद-अफजाई की और अल्बर्ट एक्का चौक तक पद कर लोगों का समर्थन किया। ढोल की थाप, मांदर की लय और झारखंडी संस्कृति की विविधता जतरा को एक अनोखे उत्सव में बदल रही थी। हौसला कि मुख्यमंत्री भी ताल पर थिरकने से खुद को रोक नहीं पाए।
सांस्कृतिक विरासत की अद्भुत झलक, आर्किटेक्ट से हुई पुष्पवर्षा
जतरा में राज्य की विभिन्न जन-जातियों और स्थानीय समुदायों ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य, गीत, वाद्य और हुंकारों के माध्यम से अपनी-अपनी जगहों की पहचान की। हर जिले से ऐ हुंकियों में जनजातीय जीवन, नायक-नाय्य संघ के संघर्ष, लोककला, परंपराओं और त्योहारों की झलक देखने को मिली।

जतरा के दौरान पूरी रूट पर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई
पूरे रूट पर प्लांट से पुष्पवर्षा की गई, जिससे वातावरण और भी उल्लासमय हो उठा। सड़क के दोनों ओर के लोग इस अनुठे समारोह को कैमरे में कैद करते हैं। उत्साह गौरव और सराबोर से यह जतरा झारखंड की आत्मा का सजीव चित्र उभरता है।
सीएम बोले- झारखंड अस्मिता, संघर्ष और गौरव की भूमि
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को रजत जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि झारखंड सिर्फ एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि संघर्ष, अस्मिता और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरकार झारखंड की भाषा, सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान को बचाने के लिए लगातार काम कर रही है।

सीएम बोले- झारखंड अस्मिता, संघर्ष और गौरव की भूमि
मुख्यमंत्री ने इस यात्रा में राज्य की सामूहिकता और एकता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन आने वाली परंपरा को अपने पूर्वजों और परंपरा से जोड़ने का माध्यम बनेगा। प्रातः अनु. जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने नागाबाज़ बजाकर जतरा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।
महिलाओं की अहम भूमिका, बिरसा मेमोरी पार्क का समापन
जतरा के समापन अवसर पर कृषि मंत्री शिल्पी नियो तिर्की और गांडेय के नेता सोरेन बिरसा मुंडा स्मृति पार्क उपसंहार। उन्होंने ढोल-नगाड़ा बजाकर जतरा का स्वागत किया और पारंपरिक नृत्य में शामिल होकर उत्सव को और भी जीवंत बना दिया।

मोरहाबादी में देर शाम सूर्योदय दिखाया गया।
बड़ी संख्या में जनजातीय व्यवसाई, छात्र, सांस्कृतिक आश्रम, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विभिन्न विविध एवं सांस्कृतिक प्लास्टिक ने अपने प्रस्तुतियों से लेकर कार्यक्रमों को खास बनाने में अहम भूमिका निभाई। रजत जयंती का यह आयोजन मांझी अस्मिता का भव्य और ऐतिहासिक क्षण साबित हुआ।
मोरहाबादी में सांस्कृतिक संध्या, संगीतकार राव ने बांधा समा
स्थापना दिवस के दूसरे दिन मोरहाबादी में देर शाम तक सांस्कृतिक कार्यक्रम चला। स्थानीय कलाकारों के कलाकारों के बाद बॉलीवुड सिंगर पैट्रिक राव ने अपनी टीम के साथ एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत किये।

देर शाम तक लोग सिंगर अमिताभ राव के चित्रपट में झूमते रहे।
उनके सहयोगियों के बीच सहयोगी विचारधारा सोरेन ने भी मंच पर सांपों और मछुआरों का साथ दिया। रात को हुए महाराजा शो ने नई पाइपलाइन दी, जिसमें झारखंड की कहानी और गुरुजी शिबू सोरेन के जीवन की शुरुआत हुई। देर रात तक चले इस कार्यक्रम में राज्यवासियों को रजत उत्सव की स्मृति दी गई।














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