अंतिम बारिश से किसान ना हो परेशान, बस धान पर ना रहे प्रतिबंध, ये हैं तीन फसल भुगतान

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फ़्राईफ़ बारिश से किसान ना हों परेशान, ये तीन फसलें मांगेंगी फ़ायदे

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कम अवधि वाली धान की किस्में: झारखंड के देवघर में इस बार किसानों की चिंता बढ़ा दी गई है। जिले के कई किसानों ने समय पर सलाह की जुताई कर ली थी और अच्छी बारिश की उम्मीद में धान की खेती की पूरी तैयारी भी कर ली थी। लेकिन अब तक उम्मीद है कि बारिश नहीं होने से परामर्श में बिचड़ा तैयार नहीं हो रहा है। कई स्थानों पर किसान आकाश की ओर से टकी प्लांटों में बारिश का इंतजार किया जा रहा है, ताकि धान की बर्बादी शुरू हो सके। समय लगातार बीत रहा है और बारिश नहीं होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। यदि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रही, तो धान की खेती पर सीधा असर पड़ सकता है।

कृषि विशेषज्ञ वकील यादव ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि अगर किसानों को डर लगता है तो किसानों को डरने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले उन्हें लंबी अवधि में तैयार होने वाली धान की सॉसेज के बजाय कम अवधि वाली किलोग्राम का चयन करना चाहिए। इससे फसल की तैयारी कम समय में होगी और अगर बारिश भी कम हुई तो नुकसान की आशंका काफी कम रहेगी।

उनके अनुसार, स्थिर मौसम को देखते हुए खेती की रणनीति बदलना ही सबसे बेहतर विकल्प है। वकील यादव ने कहा कि यदि बारिश और कम होती है तो किसानों को सिर्फ धान पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए। ऐसे कई फसलें हैं, खेती से कम पानी भी आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। इनमें से सबसे बेहतर विकल्प मक्का है।

मक्का की खेती में धान की तुलना में काफी कम पानी की जरूरत है। इसकी कीमत भी कम आती है, जल्दी तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी मांग भी अच्छी रहती है। यदि किसान सही समय पर मक्के की मूर्तियां बनाते हैं, तो उन्हें अच्छी तरह से बनाने के साथ-साथ बेहतर प्रदर्शन भी मिल सकता है।

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मक्का के अलावा मूंग और मडुआ की खेती भी कर सकते हैं. मूंग में कम समय में तैयार होने वाली फसल अच्छी होती है और बाजार में इसकी अच्छी कीमतें होती हैं। वहीं, मडुआ ऐसी फसल है, जो कम बारिश और किसानी वाली है, जो कि रिजलैंड में भी अच्छे निर्माता हैं। खेती में इसका खर्च ज्यादा नहीं दिखता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के कारण बाजार में इसकी मांग भी तेजी से बढ़ रही है।

ऐसे में किसानों के लिए कम जोखिम और अधिक मुनाफ़ा का बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। कृषि विशेषज्ञ का कहना है कि खेती को पूरी तरह से मौसम पर प्रतिबंध होना चाहिए, लेकिन सही समय पर सही फसल का चुनाव करने से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इसलिए यदि अगले दिनों में बारिश सामान्य नहीं होती है, तो किसान समय गंवाए कम अवधि वाली धान की खेती के साथ-साथ मक्का, मूंग और मडुआ जईया की खेती पर भी ध्यान दें। इससे पहले की संभावना के बावजूद अच्छी निर्माण बैठक की संभावना, लागत कम होगी और किसानों की आय भी सुरक्षित रहेगी।

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