गुमला की मशहूर ‘देसी कचेरी’! सिलवटे पर पिसी दाल का जादू 40 साल की दूरी, 20 किमी दूर से आया शौक
आखरी अपडेट:
गुमला प्रसिद्ध चना दाल कचरी रेसिपी: गुमला जिले में ठंड के बीच टोटो स्थित शिव भोजन शक्ति की गरमा-गरम कचरी की चर्चा का केंद्र बनी हुई है. पिछले 40 वर्षों से अपनी पहचान बनाए रखने वाले इस होटल में आज भी पारंपरिक तरीके से सिलवट पर दाल पीसकर कचरी तैयार की जाती है। 5 रुपए में मिलने वाली इस कचेरी के दीवाने हैं कि लोग 10 से 20 किमी तक के सफर में आकर यहां की रेसलर हैं। जानिए जायके का राज और इसकी खास रेसिपी.
गुमला: आज के आधुनिक दौर में देशी पिज्जा और बर्गर का चलन बढ़ गया है, लेकिन देसी स्वाद का कोई विकल्प नहीं है। झारखंड के गुमला जिले में इन दिनों ठंड पड़ रही है। ऐसे मौसम में अगर हाथ में गरमा-गरम कचरी और साथ में चिप्स मिल जाए, तो दिन बन जाता है। गुमला जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर टोटो नामक स्थान पर स्थित शिव शक्ति भोजनालय आज कल इसी स्वाद के लिए चर्चा का केंद्र बना है।
40 साल की और विरासत सिलवट का कमाल
इस भोजनालय की सबसे बड़ी प्रकृति इसकी चना दाल की कचरी है। होटल के मालिक नीरज कुमार गुप्ता ने बताया कि यह दुकान उनके पिता ने करीब 40 साल पहले शुरू की थी। नीरज ने बचपन से ही अपने पिता के साथ काम करते हुए खाना और नाश्ता बनाने के लिए पिता के साथ काम किया। आज यहां का स्वाद इतना प्रसिद्ध शहर हो गया है कि गुमला, घाघरा तट और आसपास के इलाकों से लोग सिर्फ कचेरी खाने के लिए 10 से 20 किमी की यात्रा तय करके टोटो शुरू करते हैं।
यहां की कचौरी क्यों है खास?
नीरज कुमार बताते हैं कि यहां पारंपरिक तरीकों की जगह मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। चना दाल को 3 से 4 घंटे तक पकने के बाद इसे सिलवट पर पीसा जाता है. दरदरी पिसी दाल ही कचेरी के असली कुरकुरेपन का राज है। इसमें हरी मिर्च, इलेक्ट्रॉनिक्स कटा प्याज, अदरक-लहसुन का पेस्ट और जीरा का एक खास मिश्रण तैयार किया जाता है। रि फ्राइंग तेल में छन्नी हुई गरमा-गरम कचरी अकेले नहीं, बल्कि आलू-चना की रसेदार सब्जी, बादाम-धनिया-पुदीना की स्पेशल चटनी और टमाटर की देसी चटनी के साथ बनती है.
सस्ता भी और अच्छा भी
इस दौर में भी यहां स्वाद के साथ जेब की प्रस्तुति रखी जाती है। मात्र 5 रुपए प्रति पीस या 20 रुपए प्लेट (4 पीस) के खाते से कचरी उपलब्ध है। कचेरी के अलावा यहां धुसका, समोसा, कचौड़ी, इडली, बूरा, गुड़ की स्पेशल बालूशाही और नीमकी जैसे व्यंजन भी मिलते हैं. यह दुकान सुबह 6:00 बजे खुलती है और रात 9:00 बजे तक यहां खाने-पीने के शौकीनों की भीड़ लगी रहती है। इसके अलावा यहां दोपहर और रात के लिए शुद्ध भोजन की भी उत्तम व्यवस्था है। अगर आप भी गुमला की तरफ हैं तो टोटो की इस 40 साल पुरानी कचेरी का स्वाद न लें.
लेखक के बारे में
मैंने अपने 12 वर्षों के इतिहास में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और डेली भास्कर, डेली दैनिक भास्कर, डेली भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक लॉन्च हुआ। अंतिम तिथि से ले…और पढ़ें



Post Comment