गोड्डा के भगवान! जहां हर तीसरे दिन एक मौत, वहां 68 साल के शानदार चाचा ने बचाईं 400 से ज्यादा जिंदगियां
आखरी अपडेट:
गोड्डा के महादेव स्थान के रहने वाले किसान त्रिशूल सिंह के पड़ोसी दोस्त हैं, जो किसी भी समय किसी भी सड़क पर दुर्घटना हो जाते हैं, सबसे पहले दुर्घटना स्थल त्रिशूल चाचा को ही देखा जाता है। जहां वह अचानक घायल होकर अस्पताल की दीक्षांत समारोह में पहुंच गए। वहीं अगर किन्ही की मौत हो जाए तो उन्हें भी मदद मिलनी चाहिए. अब तक वे 400 से ज्यादा जिंदगियां बचा चुकी हैं।
गोड्डा: एक तरफ जहां गोड्डा जिला सड़क सोसायटी का गढ़ बनता जा रहा है। वहीं दूसरी ओर 68 साल में एक किसान किसानी की मिसालें पेश की जा रही हैं। परिवहन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में लगभग हर तीसरे दिन एक बड़ी सड़क दुर्घटना होती रहती है। इस साल अगस्त से लेकर 124 तक सड़क हादसों में 78 लोगों की मौत हो गई, लेकिन इन सिद्धांतों के बीच, गोड्डा के ‘उपेंद्र अंकल’ फरिश्ता अब तक 400 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद अस्पताल में पहुंचे हैं।
400 जिंदगियों के समर्थक, त्रिपुरा सिंह
महादेव स्थान के रहने वाले 68 वर्ष के किसान क्षत्रिय सिंह आज जिले के लिए ‘राह-वीर’ (सड़क के नायक) बन गए हैं। वे सरकार की किसी भी स्वीकृति योजना का इंतजार नहीं करते, बल्कि निस्वार्थ भाव से आकस्मिक समानता की मदद के लिए फिल्में दिखाते हैं। उनके पड़ोसियों का कहना है कि इलाके में कोई भी हादसा हो, सबसे पहले चाचा ही माके पर नजर आते हैं। वे अब तक 400 से भी ज्यादा क्रेटेशियंस को अस्पताल पहुंचा चुके हैं। 100 से अधिक गंभीर रूप से पीड़ित लोगों की जान बचाने में सीधे तौर पर मदद की जाती है।
जान बच जाये, यही कोशिश रहती है
लोकल 18 से बातचीत में रेखाराव सिंह ने बताया कि कई बार ऐसा भी हुआ कि घायल को अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उसकी जान नहीं बची। जिससे मुझे बहुत दुःख होता है. लेकिन मेरी कोशिश हमेशा यही रहती है कि कोई भी घायल सड़क पर न गिरे, उसे समय पर इलाज मिले। उनका यह सेवा भाव सिर्फ हॉस्पिटल डॉक्टरी तक सीमित नहीं है। यदि किसी पीड़ित की मृत्यु हो जाती है, तो वे उसके परिवार को बंधक बनाने में भी निस्वार्थ भाव से मदद करते हैं।
घर को बनाया सेवा केंद्र
उनका एक और उदाहरण हाल ही में देखने को मिला। एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुई महिला का इलाज पिछले 15 दिनों से वे अपने घर पर ही करवा रहे हैं और उसके रहने-खाने की पूरी व्यवस्था भी खुद कर रहे हैं। ऐसे समय में जब लोग सड़क पर दर्शकों को देखकर मुंह घुमाते हैं, तो रणबीर सिंह का निःस्वार्थ सेवा भाव पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है।
मैंने अपने 12 वर्षों के इतिहास में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और डेली भास्कर, डेली दैनिक भास्कर, डेली भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक लॉन्च हुआ। अंतिम तिथि से ले…और पढ़ें
मैंने अपने 12 वर्षों के इतिहास में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और डेली भास्कर, डेली दैनिक भास्कर, डेली भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक लॉन्च हुआ। अंतिम तिथि से ले… और पढ़ें
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