नैनिताल समाचार: नहीं लगेगी दिल्ली की दौड़! बजट से जगी उम्मीद, अभ्यारण्य को कैसे बदलेगा हॉस्पिटल टूरिज्म, जानें

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नैनीताल हॉस्पिटल टूरिज्म: बजट 2026 में विश्व आर्किटेक्चर की स्थापना, राष्ट्रीय राजधानी को मेडिकल स्टोर हब के रूप में विकसित करने, विदेशी मरीजों के लिए चमत्कारी प्रक्रिया को आसान बनाने और सिंगल-विंडो सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव है। इन लोगों को इलाज के लिए मछली, सब्जी या दिल्ली जैसी शहरों की मछली नहीं खानी पड़ती। स्थानीय उद्योगों को भी कार्यशालाएँ. उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति, शुद्ध हवा, बेहतर एयर क्वालिटी शेयर (AQI) और असमान गुणवत्ता वाले उत्पाद स्वास्थ्य लाभ के लिए आदर्श शेयर हैं। यहां योग, आयुष चिकित्सा और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां सबसे पहले लोकप्रिय हैं। इसलिए बस मदद से काम बन सकता है।

बाद में. उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ों के पर्यटक और सुंदर पर्यावरण के लिए प्रसिद्ध समुद्र तट के पर्यटक स्थल अब सिर्फ पर्यटन ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं का भी बड़ा केंद्र बन सकते हैं। केंद्र सरकार के मालदीव बजट में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए की गई घोषणा में इस दिशा में नई सुविधाएं जगाई गई हैं। पर्यटन से जुड़े लोगों का मानना ​​है कि अगर अनुमति को सही तरीके से लागू किया जाए तो अभ्यारण्य और आसपास के कुमाऊं क्षेत्र के देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। बजट में विश्वस्तरीय आर्किटेक्चर की स्थापना, आधुनिक चिकित्सा उपकरण और डिजिटल स्वास्थ्य बेंचमार्क को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। विदेशी व्यापारियों के लिए विदेशी बाजारों को आसान बनाने और सिंगल-विंडो सुविधा शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें पहाड़ी राज्यों से स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की घोषणा की गई है।

अंतिम तिथि नहीं

प्रयोगशाला में मेडिकल टूर पर्यटन की दुकानें नई नहीं हैं। ब्रिटिशकाल में यहां जलवायु की स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक मान्यता प्राप्त थी। भवाली स्थित प्रसिद्ध सैनिटोरियम अस्पताल एक समय एशिया के चुनिंदा प्रमुख विशेषज्ञ विशेषज्ञों में शामिल था, जहां टीबी सहित कई खिलाड़ियों के मरीज दूर-दराज से इलाज के लिए आए थे। आज यह विशाल सीमांत जंगल स्थिति में है, लेकिन लोगों का मानना ​​है कि इसका पुनर्जीवन से संपूर्ण क्षेत्र स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा केंद्र बन सकता है। इस अस्पताल में उस दौर में ब्रिटिश कई अधिकारी और यहां तक ​​कि पंडित जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू का इलाज हो चुका है।

होटल एसोसिएशन के सचिव वेद साहा का कहना है कि कुमाऊं में मेडिकल टूरिज्म के अड्डे बहुत अधिक हैं। उनके अनुसार, यदि भवाली सेनोटेरियम का जीर्णोद्धार कर आधुनिक अस्पताल के रूप में विकसित किया जाए तो न केवल स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य विशेषज्ञ बनाएं, बल्कि बाहरी राज्यों से आने वालों की संख्या भी बढ़े। इन लोगों को इलाज के लिए सब्जी, बस्ती या दिल्ली जैसे शहरों की दुकानें नहीं लगतीं, उद्योग और स्थानीय उद्योग को भी जगह मिलती है।

नये आयाम

पर्यटन विभाग भी सबसे पहले पर्यटन के नये आयामों के रूप में देख रहा है। पर्यटन अधिकारी अतुल भंडारी के सलाहकार हैं कि मेडिकल टूर वीजा रिजर्व स्वास्थ्य सेवाएं और पर्यटन का संयोजन है। उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति, शुद्ध हवा, बेहतर एयर क्वालिटी शेयर (AQI) और असमान गुणवत्ता वाले उत्पाद स्वास्थ्य लाभ के लिए आदर्श शेयर हैं। उनका कहना है कि टीबी और इलेक्ट्रानिक क्लिनिक के लिए भवाली सेनोटेरियम और रैमजे हॉस्पिटल का उपयोग किया जा सकता है। पर्यटक अधिकारी उत्तराखंड के पर्यटन विभाग तक सीमित नहीं हैं। यहां योग, आयुष चिकित्सा और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां सबसे पहले लोकप्रिय हैं। यदि आयुष चिकित्सक, होम-स्टे, योग रिट्रीट और वेलनेस थेरेपी को एक साथ जोड़ा जाए तो दोस्ती और मसाले को इलाज के साथ आरामदायक अनुभव भी मिल सकता है। इससे लंबे समय तक समर्थित वाले स्वास्थ्य उद्योग की संख्या, जो स्थानीय रोजगार और होटल उद्योग के लिए भी प्रतियोगी साबित होंगे।

बॅंचर गंतव्य

वर्तमान समय में बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण और भाग-दौड़ वाले जीवन के कारण लोग शांति और स्वच्छ वातावरण में उपचार करना चाहते हैं। उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों की तुलना में उत्तराखंड की जलवायु स्वास्थ्य के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ उत्तराखंड को नेशनल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की सलाह दे रहे हैं। यदि केंद्र और राज्य सरकार के समूह में प्लास्टरबोर्ड, सड़क, आपात्कालीन सेवाएँ और विशेषज्ञ दार्शनिकों की दृष्टि पर ध्यान देने की सुविधा हो तो औद्योगिक पर्यटन पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे न केवल पर्यटन सीज़न पर पोर्टफोलियो कम होगी बल्कि सालभर इकोनॉमिक ऑटोमोबाइल ऑटोमोबाइल। पहाड़ के लोगों को भी मिलती है बेहतरीन चिकित्सा ओझा।

लेखक के बारे में

प्रियांशु गुप्ता

प्रियांशु के पास पत्रकारिता में 10 साल से ज्यादा का अनुभव है। न्यूज 18 (नेटवर्क 18 ग्रुप) से पहले उन्होंने राजस्थान पत्रिका और अमर उजाला के साथ काम किया था। उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की है…और पढ़ें

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