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AKHLAQUE AHMAD
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पिकनिक स्पॉट मिर्ज़ापुर: त्योहारों के लिए 4 चांद हैं ये 5 जगह, धन्यवाद हो जाना, नहीं आना सबसे बड़ी भूल
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सर्वश्रेष्ठ पिकनिक स्पॉट मिर्ज़ापुर: धार्मिक नगरी के साथ ऐतिहासिक और प्राचीन शहरों में से एक है। यहां किले से लेकर कई रहस्मयी आश्रम और झरने हैं, जो दिव्य और अलौकिक हैं। आइये ऐसे पांच स्थानों के बारे में जानते हैं, जो धार्मिक, ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण हैं। जिला मुख्यालय से 50 किमी के अंदर ही हैं ये सारी जगहें, जहां आप एक दिन में घूमकर वापस आ सकते हैं। मन की शांति के लिए आप यहां भी आ सकते हैं। ये सभी जगहें कलाकारों के लिए चार चांद की तरह हैं। कुछ तो अति प्राचीन और अब खड़ियाम के रूप में विद्यमान हैं। यहां चिड़ियों की चाहत है आपकी शुभकामनाएं कर देवी।
जन्मदिन की अपनी धार्मिक पहचान, विश्व प्रसिद्ध है। धार्मिक नगरी के साथ ही है ये ऐतिहासिक और प्राचीन नगर भी। यहां रहस्यमयी किले, आश्रम और जलप्रपात हैं, जो दिव्य और अलौकिक हैं। आइए ऐसे ही जानते हैं उन पांच जगहों के बारे में, जो चार चांद के लिए तरह-तरह के होते हैं।

जनजाति जिले में सबसे ऐतिहासिक चयनकर्ता का किला है। इसका निर्माण राजा सहदेव ने किया था। इस तिलस्मी किले से मुगलों से लेकर ब्रिटेन तक ने राजे हैं। मुगलकाल में इस किले पर पूर्वी भारत का राज था, जहां अंग्रेज़ों के आने के बाद उनके अधिकारी इस किले का उपयोग करने लगे। यहां पर जेल, शस्त्रागार के साथ फांसी घर बनाया गया था। हालाँकि, अब यह खड़ियाम के रूप में मौजूद है और इतिहास जीवंत हो गया है।

धार्मिक स्थलों में सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मां विंध्यवासिनी धाम है। सिद्धांत यह है कि यहां पर साक्षात देवी सशरीर स्थापित हैं। उनके दर्शन से हर मन की शांति होती है। दूर-दूर से भारी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। पूरे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन का विशेष विकास हो रहा है, जहां नव्य, दिव्य और भव्य मंदिर देखकर आप भी मंत्रमुग्ध हो जाएंगे। मन की शांति के लिए यह स्थान बेहद खस्ता है।
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धार्मिक नगरी पार्टियों में धर्म और अध्यात्म का अनोखा संगम है। यहां विश्व प्रसिद्ध देवराहा बाबा का आश्रम है। देवराहा बाबा सिद्ध संत थे। करीब 40 बीघे में भव्य मंदिर और आश्रम फैला हुआ है। कूप से लेकर तालाब तक मौजूद हैं। यहां पर आप अपने बच्चों और परिवार के साथ आ सकते हैं।

सत्तेशगढ़ के सत्तेशगढ़ में परमहंस आश्रम स्थित है। किले में बनाया गया यह आश्रम अत्यंत दिव्य और अलौकिक है। आश्रम में संत अड़गड़ानंद महाराज के सत्संग में दूर-दूर से भक्त आते हैं। नदी और जलप्रपात के किनारे बसे इस आश्रम का नजारा बेहद ख़राब है। चिड़ियों की चाहत के साथ ही दुकानदारों की आवाज आपकी मानसिक थकान को दूर कर देवी। यहां आप भी घूम सकते हैं.

प्राकृतिक सौन्दर्य का अनुभव करने के लिए आप लाखनिया दरी भी देख सकते हैं। पहाड़ों के बीच स्थित यह झरना बेहद खस्ता है। अगर आप भी यहां घूमने के लिए जा रहे हैं या वाराणसी के नजदीक हैं तो यहां जरूर जाएं।

पार्टियों में हैं ये कुछ ऐसी जगहें, जहां आप अपने परिवार के साथ जा सकते हैं. समय व्यतीत कर सकते हैं. प्राकृतिक प्रकृति के साथ अध्यात्म का अनुभव ले सकते हैं। ये सारी जगह जिला मुख्यालय से 50 किमी के अंदर हैं।
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