मकर संक्रांति पर ग्लोबा में मकरध्वज की ऐतिहासिक रथ यात्रा, जानिए क्या है सौ साल पुरानी परंपरा

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गुमला: झारखंड के गुमला जिले में स्थित अंजन धाम को भगवान हनुमान की जन्मस्थली माना जाता है। यहां हनुमान जी के प्रति लोगों की गहरी आस्था के दर्शन होते हैं। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर इसी आस्था के अंतर्गत हनुमान जी के पुत्र मकरध्वज की भव्य रथयात्रा निकाली गई। यह रथ यात्रा सीसई खंडहर के कोयल नदी तट पर स्थित जगन्नाथ मंदिर से आरंभ हुई।

मकरध्वज की रथ यात्रा की परंपरा
मान्यता है कि इस मंदिर से साल में दो बार रथयात्रा निकाली जाती है। प्रथम आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के अवसर पर और द्वितीय मकर संक्रांति के दिन। मकर संक्रांति पर विशेष रूप से प्रभु मकरध्वज की रथयात्रा निकाली जाती है। गुमला जिले का यह एकमात्र स्थान है, जहां भगवान मकरध्वज की रथ यात्रा की परंपरा है। इस अवसर पर हर भव्य वर्ष का आयोजन भी लगता है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं।

प्रभु का जगन्नाथ अति प्राचीन मंदिर
सीसआई शिलालेख के नागफनी क्षेत्र में स्थित यह प्रभु का अति प्राचीन मंदिर लगभग सौ वर्ष से भी अधिक पुराना है। इस मंदिर की खास बात यह है कि इसके निर्माण में किसी भी तरह का उपयोग नहीं किया गया है। यह मंदिर पत्थरों से निर्मित है और आज भी पूरी सूची के साथ खड़ा है। मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के साथ-साथ प्रभु मकरध्वज की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।

साल में दो बार रथयात्रा
मंदिर के पुजारी अनिल पांडा ने बताया कि नागफनी स्थित इस प्राचीन जगन्नाथ मंदिर से साल में दो बार रथ यात्रा निकाली जाती है। मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से हनुमान जी के पुत्र मकरध्वज की रथ यात्रा होती है। यह परंपरा केवल इसी मंदिर के दर्शन को दर्शाती है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में स्मारकों में किले हैं।

नागफनी स्थित कोयल नदी में स्नान
मकर संक्रांति के दिन सबसे पहले नागफनी स्थित कोयल नदी में स्नान करते हैं। इसके बाद मंदिर में पूजा- सार्जेंट कर भगवान को दही-चूड़ा और तिलकुट का भोग लगाया जाता है। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ होती है और उसके बाद लोग महल का आनंद लेते हैं।

रथ यात्रा की परंपरा का प्रमुख सौ वर्ष का संस्करण
पुजारी ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 1761 में रातु महाराज द्वारा कराया गया था। तब से लेकर अब तक लगभग 250 साल से अधिक समय तक यहां रथ यात्रा की परंपरा शुरू हो रही है। यह मंदिर ‘मनोकामना मंदिर’ के नाम से भी प्रसिद्ध है। व्याख्या यह है कि यहां साध्य मन से हर मन को छूट मिल जाती है। इसी विश्वास के साथ दूर-दराज से यहां दर्शन के लिए किले हैं।

घरेलू उपयोग के सामानों में तिलकुट, दही, चूड़ा, गुड़, प्रसाद, लोध, चिक्की, चाट, फुचका, मीठा माल, चाउमीन, मिर्च, झूले और चिप्स के चिप्स के साथ-साथ साजी भी शामिल हैं, जो तिलकुट, दही, चूड़ा, गुड़, प्रसाद, लोढ़ा, चिक्की, चाट, फुचका, मीठा माल, चाउमीन, मिर्च, झूले और चिप्स के चिप्स भी बेचते हैं।

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