मोबाइल-टीवी छोड़ स्केटिंग में चमक रहा कोडरमा का बच्चा! 500 रुपये में मिल रही ट्रेनिंग

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कोडरमा स्केटिंग अकादमी: सीमित और बिना स्केटिंग ट्रैक के भी कोडरमा के बच्चे स्केटिंग में कमाल कर रहे हैं। 500 रुपये महीने के फ़ीस में बच्चे यहां स्पीड स्केटिंग सीख रहे हैं और स्टेट लेवल की सहूलियत तक पहुंच बना रहे हैं।

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कोडरमा. जिले में स्केटिंग खेल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और बच्चों के बीच इसका आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। छोटे बच्चों से लेकर सामान तक में इस खेल के प्रति विशेष उत्साह देखा जा रहा है। शहरी ही नहीं, ग्रामीण इलाकों के बच्चे भी अब स्केटिंग सीखने के लिए आगे आ रहे हैं। सीमित सीमित और भव्य वस्तुओं की कमी के बावजूद कोडर के बच्चे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

सिर्फ 500 रुपये है चार्ज
इस बदलाव के केंद्र में स्केटिंग प्रशिक्षक मोहम्मद जुहैद खान हैं, जो पिछले दो वर्षों से लगातार बच्चों को प्रशिक्षण देकर इस खेल को नई पहचान दे रहे हैं। उनके सुझाव में अब तक 200 से अधिक बच्चों को विशेष रूप से स्पीड स्केटिंग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इनमें से कई बच्चों ने झारखंड के साथ-साथ राष्ट्रीय टुकड़ों में भाग लेकर जिले का नाम रोशन किया है। यहां स्केटिंग सीखने पर 500 रुपये मासिक शुल्क लग सकता है।

सरकारी कॉम्पिटिशन प्रैक्टिस प्लांट
कोडरमा जिले में अब तक स्केटिंग के लिए कोई ट्रैक उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद बच्चों का हौसला कम नहीं हुआ। अभ्यास के लिए शहर की सड़कों, मोहल्लों की सड़कों, सर्विस रोड और सरकारी क्षेत्रों का उपयोग किया जा रहा है। जिला समाहरणालय परिसर, झुमरी तिलैया का चांडक पेट्रोलियम और गंजी फील्ड बच्चों के नियमित अभ्यास स्थल बन गए हैं। शाम के समय एक रेस्तरां में छोटे-छोटे बच्चों को स्केटिंग प्रशिक्षण अभ्यास करते हुए देखना आम बात हो गई है।

चार से चौदह वर्ष तक के बच्चों को प्रशिक्षण
मोहम्मद जुहैद खान ने बताया कि यहां उनके 4 साल से लेकर 18 साल तक के बच्चों को ट्रेनिंग दी जाती है। उनका उद्देश्य केवल स्केटिंग सिखाना नहीं है, बल्कि बच्चों को प्रशिक्षण देना, कोचिंग और फिजियोलॉजी का विकास करना भी है। उनका मानना ​​है कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए स्केटिंग बेहद उपयोगी खेल है।

स्केटिंग प्रशिक्षक जुहैद ने कहा कि अगर कोडरमा में एक आधुनिक स्केटिंग ट्रैक का निर्माण किया जाता है, तो न केवल बच्चों को बेहतर अवसर मिल सकते हैं, बल्कि जिलों को राष्ट्रीय मानचित्र पर भी पहचान मिल सकती है।

बच्चों को मोबाइल और टीवी की लता से बचाया जा रहा है स्केटिंग
प्रशिक्षक ने बताया कि स्केटिंग का खेल क्या है। स्केटिंग का अभ्यास करने से संतुलन बना रहता है और शरीर स्वस्थ रहता है। स्कूल से घर लौटने के बाद मोबाइल और टीवी की जद में जाने वाले बच्चों को तनाव से मुक्ति दिलाने के लिए स्केटिंग एक बेहतर विकल्प के रूप में सामने आई है। 6 महीने तक प्रैक्टिस के बाद बच्चे को स्केटिंग अच्छी तरह से सीखने को मिलती है और कोडरमा से ड्रेनेज स्टेट लेवल की पढ़ाई में शामिल होने के काबिल बन जाते हैं।

लेखक के बारे में

रैना शुक्ला

रिचमंड यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट। पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और एबीपी न्यूज से हुआ न्यूज18 हिंदी तक पहुंचा। पर्यटक और देश की …और पढ़ें

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