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किसान से बनी अपनी पहचान, खुद के उत्पादों से कमा रहे लाखों-करोड़ों, खेती को ब्रांड बनाया, खेती से करोड़ों के बिजनेस तक, झारखंड के किसान बने सफल बिजनेसमैन, रांची के इन किसानों ने बनाई ली अपनी पहचान, रांची के किसानों की प्रेरक कहानी, रांची के तीन किसानों ने बनाई सफलता का नया मॉडल, रांची न्यूज
AKHLAQUE AHMAD
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रांची के इन किसानों ने बनाई अपनी पहचान, खुद के प्रोडक्ट से कमा रहे लाखों-करोड़ों
आखरी अपडेट:
रांची बिजनेस मैन: झारखंड की राजधानी रांची में ऐसे कुछ किसान हैं, पहले तो खेती की और यही करते-करते बिजनेस में कदम रखा और अपनी कंपनी भी स्थापित की। खास बात यह है कि जिस चीज की खेती करते हैं, उससे भी ज्यादा की जरूरत है और उसी प्रोडक्ट को बेचकर आज करोड़ों कमा रहे हैं। इनकी कहानी किसी को भी प्रेरणा दे सकती है। जानिए इन तीन किसानों के बारे में विस्तार से।
इस श्रेणी में सबसे पहला नाम आता है अमित का। मूंगफली की खेती और चंदन से पापड़, अचार, चटनी और नहीं भी तो कम से कम 25-30 तक की कमाई का काम करते हैं। आज की दो रचनाएँ हैं। अमित कहते हैं कि हर दिन 300 किलों के मशरूम का उत्पादन होता है। ऐसे में हमने सोचा कि क्यों न इससे और किस तरह के उत्पाद बनाएं। ऐसे में हमारे पास मशरूम के टुकड़े तक बने हुए हैं.

आगे के सुझाव किसी खाने में तो टेस्टी ही लगते हैं। इनमें शामिल हैं और ये साडी चीजें बिना मैदा की, तो इसके ग्राहक ऐसे हैं कि अगर पता चल जाए कि यहां मिल रहा है, तो एडवांस में ही चार-पांच लेकर रख लेते हैं। यहां पर आपको मशरूम की चॉकलेट तक और ये उत्पाद रांची ही नहीं, बल्कि लगभग हर एक जिले और रांची से बाहर बिहार और यूपी तक जाते हैं। रेनओवरओवर दो करोड़ तक चला गया है।

दूसरा नाम है, सिद्धार्थ महतो जो मिलेट और मक्के की खेती करते हैं। वह निकला जो स्टाम्प होता है, उसे स्टाम्प का काम करते हैं। इसके लिए उन्होंने “फीडको एग्रोटेक” नाम की कंपनी बनाई। इस कंपनी के अंतर्गत मिलेट और मक्का के जो स्ट्रेंथ होते हैं, शानदार पेंटिंग्स बिल्कुल प्रोफेशनल तरीके से इसी प्लेटफॉर्म के जरिए ड्रामा का काम करते हैं। असल में, इन सभी मूल निवासियों की जरूरत है बड़ी-बड़ी कंपनी, जैसे मदरसा आश्रम को स्थापित किया गया है।
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तीसरे, बुधन सिंह के निर्माता भी हैं,मोती की खेती की और फिर मोती के ही गले के लॉकेट लेकर बनाने का काम शुरू हुआ और अपनी कंपनी खड़ी की। मूल “एग्रोटेक” कंपनी का नाम है, जिसके तहत मोती से जुड़ी हुई कई साडी वस्तुएं चुराने का काम करती हैं। बुधन मंदिर में मोती की खेती करने की प्रेरणा मोदी जी से मिली।

‘मैं तो पहले छोटे पैमाने पर करता था, एक बार मोदी जी किसी कार्यक्रम में मेरे स्टॉल पर आए और उन्होंने देखा। वह खुश हो गया और बोला कि यह तो सुंदर में होता है, तुम घर के टेबल पर ही बन रहे हो, बहुत शानदार काम है, करते रहो। वहां से जो प्रेरणा मिली, आज यहां तक पहुंच गई। ‘रात का टर्नओवर 40 लाख पार है।’



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