विक्रम शर्मा हत्याकांड- भाई ने लिखी थी रामायण की लिपि: विक्रमादित्य की हुई पहचान; झारखंड में करोड़ों की संपत्ति की रची थी साजिश – देहरादून समाचार
वकील विक्रम शर्मा की हत्या के मामले में भाई का नाम सामने आया।
विक्रम शर्मा हत्याकांड में भाई ने ही लिखी थी गर्लफ्रेंड की स्क्रिप्ट। पुलिस जांच में स्टार्स की पहचान हो गई है और करोड़ों की संपत्ति के लालच में झारखंड में प्लॉट रचे जाने के स्टारशिप साइन मिले हैं। आरंभिक तफ़तीश बता रही है कि हत्या की कहानी महीनों पहले तैयार की गई थी
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एसोसिएशन के राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी मॉल में शुक्रवार सुबह हुई गैंगवार की घटना को अंजाम दिया। बाहुबली के अपराध जगत में गद्दार का नाम रहे और लोकतांत्रिक लोकतांत्रिक सिंह के ‘गुरु’ माने जाने वाले विक्रम शर्मा (45) की हत्या के पीछे पारिवारिक साजिश की कहानी सामने आ रही है। पाठ्यपुस्तक के अनुसार, संरचना की नींव के आधार पर आदिवासियों के मानगो क्षेत्र तक फैलाए जाते हैं, जहां जुलाई 2025 में ही पूरी योजना तैयार कर ली गई थी। पुलिस द्वारा अब पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है।
सीसीटीवी में भागते दिखे दो दुकानदार।
भाई ने ही क्यों दी सुपारी
अल्पसंख्यक पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच से जो कहानी उभरकर सामने आई है, वह बेहद प्रतिस्पर्धी वाली है। विक्रम शर्मा की हत्या की योजना रातों-रात नहीं बनी। इसकी किताब जुलाई 2025 में ही पढ़ी गई थी। जानकारी के मुताबिक, विक्रम शर्मा का छोटा भाई अरविंद शर्मा जुलाई में गांव के मानगो इलाके में पहुंचे थे। यहां उनकी मुलाकात उनके एक पुराने दोस्त प्रभात से हुई। इसके बाद विक्रम शर्मा को रास्ते से हटाने की ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार की गई।
खून के छींटे भारी जमीन पर पड़े
पुलिस की थ्योरी के मुताबिक, इस हत्या का मुख्य कारण बिस्टुपुर और दुकान में स्थित करोड़ों की आमी और नामी संपत्ति है। 1998 में बदमाश अशोक शर्मा की हत्या हुई थी। इस हत्या में विक्रम शर्मा, उनके भाई अरविंद और निकोलागोनल सिंह महाराजा थे। अशोक शर्मा की मौत के बाद विक्रम ने टूटे दिमाग का इस्तेमाल करते हुए अशोक की विधवा पिंकी शर्मा की शादी अपने छोटे भाई अरविंद से करवा दी। मकसद साफ था- अशोक शर्मा की करोड़ों की संपत्ति और बिजनेस पर परिवार का कब्जा जमा रखना।
मृगतृष्णा वृतांत विक्रमी के पास ही रह रहा है
पिंकी से शादी के बाद अरविंद शर्मा के पास पदनाम तो आई, लेकिन असली मखौल राजशाही के पास ही रह रहा है। जेल से छूटने और दफन होने के बाद विक्रम नक्षत्र और बिष्टुपुर की संपत्ति पर अपना एकाधिकार प्राप्त होना लगा था। अरविंद को यह नागवार गुजर रहा था। कंपनी की जमीनें और स्टोन क्रशर के कारोबार में मालदीव को लेकर मित्रवत उद्योग स्थापित किए गए थे। इसी विवाद को खत्म करने के लिए अरविंद ने ‘भाई’ को ही रास्ते से हटाने का फैसला लिया।

सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई विक्रम की तस्वीरें।
रेकी से लेकर मर्डर तक प्लान बनाया गया था
इस हत्याकांड को अंजाम देने के लिए पेशेवर फिल्मों का इस्तेमाल किया गया। पुलिस को मिले सुराग हैं कि हत्यारा झारखंड से पहाड़ी रांची उत्तराखंड थे। यह एक ‘कॉन्सिलिट किलिंग’ थी, जिसे बेहद पेशेवर तरीकों से अंजाम दिया गया। हरिद्वार पुलिस की जांच में एक अहम कड़ी हाथ लगी है। हत्यारों ने अपनी पहचान के लिए अपनी कलाकृतियों का उपयोग नहीं किया। आकाश कुमार प्रसाद का नाम सामने आया है, उन्होंने हरिद्वार रेलवे स्टेशन की एक दुकान से दो गाड़ियाँ किराए पर लीं। वह अपनी पहचान के तौर पर झारखंड के कस्टमर आधार कार्ड जमा करने वालों की पहचान कर रही है। गुरुवार को उन्होंने एक बाइक किराए पर ली। इसके बाद, विश्वनाथ वाली सुबह यानी शुक्रवार शाम 4 बजे वे एक स्कूटी भी किराए पर ले लीं। सुबह 4 बजे हरिद्वार से ये किरण सुबह 9 बजे तक पहुंच गई।
श्रिया पहले से ही घाट लगा बैठे थे
उन्होंने सबसे पहले सिल्वर सिटी मॉल और विक्रम शर्मा की रेकी की। उन्हें पाठ्यपुस्तक में बताया गया था कि विक्रम कब जिम आता है और कब वापस आता है। सुबह करीब 10:10 बजे विक्रम शर्मा सिल्वर सिटी मॉल स्थित ‘एनी टाइम, एनी क्लब’ जिम में अपना प्रोजेक्ट खत्म कर बाहर निकल रहे थे। उसके पास अपनी लाइसेंसी वैधता थी, लेकिन उन्हें संभलने का मौका ही नहीं मिला। दो फिल्में पहले से ही मॉल की किताब पर घाट लगा बैठे थे। जैसे ही राक्षस ने बेहद करीब से हथियार बंद करना शुरू कर दिया। विक्रमादित्य को कुल तीन पट्टियाँ मिलीं। दो सीधे सिरों में उकेरे गए, जिससे उनका उपकरण ही मृत हो गया। विश्ल्ट को अंतिम रूप देने के बाद दोनों स्काई वॉकर ही मॉल से बाहर भागे, जहां कुछ दूरी पर उनके तीसरे दोस्त ब्लैक कलर की बाइक खड़ी थी। त्रि बाइक पर सवार हो गए।

इन कथाओं ने यूनिवर्स को दिया अंजाम
मिले सुरागों के बेस पर पुलिस ने तीन प्रतिभागियों की पहचान कर ली है। ये तीनों समुदाय के बागबेड़ा और जुगसलाई इलाके के अपराधी हैं और गणेश सिंह गिरोह से जुड़े हुए हैं।
- आकाश कुमार प्रसाद (21 वर्ष)बागबेड़ा, मोहम्मद का रहने वाला आकाश एक खिलाड़ी है। पुलिस को होटल से उसका आधार कार्ड मिला है, जिसमें उसकी जन्मतिथि 27/03/2004 दर्ज है। उस परसुडीह इलाके में एक शराब व्यापारी की हत्या का आरोप है। सीसीटीवी में कैद तस्वीर में वह साफ दिख रही हैं।
- आशुतोष कुमार सिंह (23 वर्ष)बागबेड़ा निवासी आशुतोष कुमार सिंह का भी होटल से आधार कार्ड बरामद हुआ है, जिसमें जन्मतिथि 19/10/2003 है। आशुतोष का नाम रेलवे एजीएल नीरज किसानों के मामले में मुख्य रूप से सामने आया था। वह पिछले साल से क्राइम की दुनिया में एक्टिव है।
- विशाल सिंह जुगसलाई निवासी विशाल सिंह टिकड़ी का सबसे खतरनाक चेहरा माना जाता है। विशाल पर रॉकेट में रॉकेट दागने वाले शख्स पर लगा है हत्या का आरोप। इस मामले में उसे जेल जाना पड़ा और जेल से बाहर निकलना पड़ा।

सोशल मीडिया पर अपने शिलालेख के साथ फिल्मी अंदाज में प्रवेश द्वार विक्रम।
व्हाइटपोश बनने की चाहत और ‘3-पी’ का मास्टरमाइंड
विक्रम शर्मा केवल एक अपराधी नहीं था, वह अपराध का ‘कॉर्पोरेट मैनेजर’ था। कम्युनिस्ट पार्टी के दस्ते में उन्हें नेपोलियन सिंह का ‘ब्रेन’ कहा गया था। विक्रम ने अपराध जगत में टिके रहने के लिए पुलिस, पॉलिटिशियन प्रेस को नियंत्रण करने का फार्मूला इजाद किया था। 2004 से 2009 के बीच के कई स्टैडदार और स्टैड के अधिकारी उनके सीधे संपर्क में थे। वह अपने जहाज़ (जैसे दादाजी और बड़ा निज़ाम) को पुलिस के माध्यम से ही मरवाता या जेल स्पेक्ट्रम देता था।
एडवांस में एलाज़िया जीवन
कॉकरोच में ख़ून-ख़राबा के बाद विक्रम 2017 से दस्तावेज़ बसा था। यहां वह अमन विहार के ‘ग्रीन व्यूज लॉजिस्टिक’ में एक अनमोल रिज़ॉर्ट की तरह रहते थे। उसके पास ऑडी और इनोवा स्थित था। पड़ोसियों को सांप तक नहीं पता कि उनके बीच 30 से ज्यादा हत्याएं और घोटाले का मामला चल रहा है। वह खुद ‘व्हाइटपोश’ नेता के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे थे और हाल ही में अल्पसंख्यक की राजनीति में फिर से सक्रिय हो गए थे।

गुरु-शिष्य का संबंध
विक्रम ने ही अलोकतांत्रिक सिंह को ‘डॉन’ बनाया था। उन्होंने समाजवादी तानाशाही के ‘हार्डकोर’ बन सके थे, जिसमें उन्होंने मार्शल आर्ट्स की फिल्में बनाईं। श्रीलीडर्स के मालिक आशीष डे और टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी एस्किल सिंह की हत्या ऐसी ही ‘गुरु-शिष्य’ की जोड़ी ने प्लान की थी।
उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई
उत्तराखंड आज़ाद और पुलिस ने झारखंड पुलिस से संपर्क किया है। एक टीम झाखंड भी डूब गई है और स्क्रीनर्स के घर में गुड़िया दे रही है। पुलिस उस फ़्लाइट के रिकॉर्ड रिकॉर्ड में रही है, जो कि मिक्सर कंपनी के शोरूम से आये थे। साथ ही, हरिद्वार में जिस दुकान से बाइक किराए पर ली गई, उसके आसपास के सोसायटी से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या कोई स्थानीय व्यक्ति (लोकल हैंडलर) उनकी मदद कर रहा था। विक्रम की पत्नी सोनिया शर्मा का बयान और टेक्निकल स्टूडियो के आधार पर पुलिस अरविंद शर्मा की तलाश कर रही है। खतरा यह है कि वह नेपाल या किसी अन्य राज्य में अंडरग्राउंड हो गया है।
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वैल्यूएशन के सिल्वर सिटी मॉल की सब्जेक्ट पर शुक्रवार की सुबह तड़तड़ाती चॉकलेट की आवाज गूंजी तो किसी ने नहीं सोचा था कि सॉलिड के वैल्यूएबल रिचमंड विक्रम शर्मा की कहानी खत्म हो जाएगी। जिम से सोलो कर बाहर निकला विक्रम पर घाट प्लॉट सीतारियों ने बेहद करीब से अपने हथियार की, तीन चालन और मशीन पर ही अंत हो गया। मजबूत पुलिस इसे गैंगवार और बदमाशों के एंगल से परख रही है, जबकि झारखंड पुलिस अपने पुराने दुश्मनों की तलाश को फिर से पलट रही है। (पूरी खबर पढ़ें)
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