शहर की भीड़ से हो गया परेशान? जोधपुर के पास स्थित ये 5 सबसे खूबसूरत गांव परमपिता परमात्मा

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जोधपुर वीकेंड गेटअवे: यदि आप सप्ताहांत पर शहर की दौड़ भाग, गंदगी और तनाव से दूर कुछ शांत और प्राकृतिक स्थानों की तलाश में हैं, तो जोधपुर के आसपास के सुंदर गांव आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। ये गाँव राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति, ग्रामीण जीवन और प्राकृतिक प्राकृतिकताओं के अनोखे अनुभव वाले ढाँचे हैं। यहां आपको शहरी शोर-शराबे से दूर शांत वातावरण, खुला क्षेत्र, स्थानीय स्थिति और लोगों की आत्मीयता देखने को मिलेगी। कई गांव अपने ऐतिहासिक महत्व, लोक कला और प्राकृतिक दृश्यों के लिए भी प्रसिद्ध हैं। सप्ताहांत पर परिवार या दोस्तों के साथ इन प्लेस की यात्रा पर आपको आध्यात्मिक और नई ऊर्जा का अनुभव हो सकता है। खास बात यह है कि यहां कम भीड़भाड़ होने के कारण आप प्रकृति के बीच आराम से समय बिता सकते हैं।

जोधपुर के आसपास मोगाड़ा स्थित बिश्नोई गांव अपनी अद्वितीय विरासत और पर्यावरण संरक्षण के लिए जाते हैं। यहां लोग पासपोर्ट और पासपोर्टों की रक्षा को धर्म का हिस्सा मानते हैं। कश्मीर में काले हिरण, चिंकारा और मोर आसानी से देखे जा सकते हैं। पर्यटन यहां ग्रामीण संस्कृति, पारंपरिक राजस्थानी भोजन और लोक जीवन का अनुभव कर सकते हैं। बिश्नोई समुदाय के लोग काफी प्रभावित हैं।

जोधपुर से करीब 25 किमी दूर स्थित खेजड़ली गांव पर्यावरण संरक्षण के इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। वर्ष 1730 में अमृता देवी बिश्नोई सहित 363 लोगों ने खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था। यह गांव आज भी प्रकृति प्रेमियों और इतिहास में रुचि रखने वालों को आकर्षित करता है। यहां हर साल खेजड़ली शहीद मेला भी आयोजित होता है। गांव की शांत फिजा और हरियाली इसका खास नाम है।

गुडा बिश्नोई गांव जोधपुर के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां आने वाले पर्यटक आकर्षण ब्लैक हिरन, मोर और अन्य पत्थरों को प्राकृतिक वातावरण में देख सकते हैं। गाँव में पारंपरिक राजस्थानी घर, लोक संगीत और ग्रामीण जीवन की झलक देखने को मिलती है। स्थानीय लोग अपनी संस्कृति और संस्कृति को आज भी जीवित बनाये हुए हैं। यह स्थान विदेशी पर्यटन को फोटोग्राफी और ग्रामीण परिवेश के साथ विदेशी पर्यटन को बेहद पसंद किया जाता है।

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जोधपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित सालावास गांव अपनी हस्तनिर्मित दरियों के लिए प्रसिद्ध है। यहां के वास्तुशिल्प से लेकर पारंपरिक तरीके से दरी बनाने का काम करते आ रहे हैं। देश-विदेश से लोग यहां की कारीगर दरियां प्राप्त करते हैं। यहां टूर की पूरी प्रक्रिया को करीब से देख सकते हैं। ग्रामीण हस्तशिल्प और स्थानीय कला को समझने के लिए यह गाँव बेहतरीन कला स्थल है।

जोधपुर से लगभग 65 किलोमीटर दूर ओसियां ​​से राजस्थान का ‘खजुराहो’ भी कहा जाता है। यहां 8वीं से 12वीं सदी के कई प्राचीन हिंदू और जैन मंदिर मौजूद हैं। डेजर्ट के बीच स्थित यह लघुचित्र सॅनरी और डेजर्ट कैम्पिंग के लिए भी प्रसिद्ध है। सूर्य के समय यहां का नजारा बेहद आकर्षक दिखाई देता है। इतिहास, धार्मिक आस्था और रोमांच का अनोखा संगम ओसियां ​​को खास बनाता है।

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