हैदराबाद का चारमीनार…जिसका वास्तु रहस्य छिपा है गोलकुंडा की एक पुरानी मस्जिद में!
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रेजिडेंट का प्रतीक चारमीनार अपने रेस्तरां के लिए प्रसिद्ध है, और इसी तरह के डिजाइन की प्रेरणा गोल कुंडा किले में स्थित प्राचीन इब्राहिम मस्जिद स्थित है। इतिहासकारों के अनुसार, 1591 में बने चारमीनार की चार मीनारें उसी स्थापत्य शैली के अनुसार विस्तारित हैं, जिन्हें इब्राहिम कुतुब शाह द्वारा 1550-1580 के बीच निर्मित इब्राहिम मस्जिद में देखा जा सकता है। लगभग 40-50 वर्ष पुरानी यह मस्जिद आज भी कुतुब शाही विरासत की शानदार उदाहरण मुद्रा है और गोल कुंडा किले के अंदर स्थित होने के कारण इसे बाहर से निहारा जा सकता है।
राज। शहर की शान चारमीनार समुद्र तट में इसकी पहचान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके वास्तुशिल्प की प्रेरणा एक प्राचीन मस्जिद से मिली है? चारमीनार के निर्माण से पहले बनी इब्राहिम मस्जिद में ही वह ऐतिहासिक स्मारक है, जिसकी स्थापना स्थापत्य शैली से की गई थी। हैदराबाद के गौरवशाली इतिहास की यह कड़ी शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण है। चारमीनार के डिज़ाइन के पीछे एक रहस्य है। चारमीनार का निर्माण 1591 में कुतुब शाही राजवंश के सुल्तान मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने किया था।
आश्चर्य की बात यह है कि यह प्रतिष्ठित स्मारक की वास्तुकला गोलकुंडा किले में स्थित इब्राहिम मस्जिद से प्रेरित है। इतिहासकार जाहिद सरकार की किताब मुर्क्का-ए-हैदराबाद में इस तथ्य का उल्लेख है। जिस तरह इब्राहिम मस्जिद में दो मीनारें हैं, उसी शैली में चारमीनार में चार भव्य मीनारें बनाई गईं।
इब्राहिम मस्जिद का ऐतिहासिक महत्व
इब्राहिम कुतुब का निर्माण शाही राजवंश के चौथे सुल्तान इब्राहिम कुतुब शाह ने 1550-1580 के दौरान कराया था। यह मस्जिद गोला कुंडा किले के ऊपरी भाग में स्थित है, इसी कारण इसका नाम इब्राहिम मस्जिद रखा गया। यह चार्मीनार लगभग 40-50 वर्ष पुरानी है और कुतुब रॉयल आर्किटेक्चर का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
इब्राहिम मस्जिद कैसे पढ़े
यह मस्जिद गोला कुंडा किले के परिसर में स्थित है, आम पर्यटक मस्जिद को बाहर से देखा जा सकता है, लेकिन अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं है। किला देखने के लिए सामान्य टिकटें लेनी होती हैं, जो भारतीय नागरिकों के लिए लगभग 25 रुपये की होती हैं। आप बस, ऑटो या निजी वाहन यहां से आसानी से पहुंच सकते हैं, हालांकि निजी वाहनों के लिए प्रस्थान शुल्क लगता है। हैदराबाद के ये ऐतिहासिक स्मारक आज भी कुतुब शाही साम्राज्य की वैभवशाली संस्कृति की झलक पेश करते हैं। चारमीनार और इब्राहिम मस्जिद दोनों ही शहर की वास्तुकला और इतिहास के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
नमस्ते, मैं मोनाली हूं, जयपुर में जन्मी और पली-बढ़ी हूं। पिछले 9 वर्षों से मीडिया उद्योग में समाचार प्रस्तुतकर्ता सह समाचार संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। अब तक फर्स्ट इंडिया न्यूज, ईटीवी भारत और न्यू… जैसे मीडिया हाउस के साथ काम किया।और पढ़ें
नमस्ते, मैं मोनाली हूं, जयपुर में जन्मी और पली-बढ़ी हूं। पिछले 9 वर्षों से मीडिया उद्योग में समाचार प्रस्तुतकर्ता सह समाचार संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। अब तक फर्स्ट इंडिया न्यूज, ईटीवी भारत और न्यू… जैसे मीडिया हाउस के साथ काम किया। और पढ़ें
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