राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यादगार क्षण! सिद्धांत लोगों से मिलें, बच्चों को टॉफ़ी सिद्धांत

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एनआईटी के दीक्षांत समारोह के बाद काफिला रोके आम लोगों से मुलाकात की। इसके बाद बच्चों को टॉफी दी गई और लोकतंत्र की भावना मजबूत हुई।

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कब: बकरीद और सरायकेला-खरसावां जिले के लोगों के लिए आज का दिन लंबे समय तक यादगार रहेगा। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जब अल्पसंख्यक तीर्थस्थल पर थीं, तो उन्होंने ऐसा कदम उठाया, जिसे सुनकर हर किसी का दिल टूट गया। दस्तावेज़ सुरक्षा रिकॉर्ड तय और प्रोग्राम से अलग हटकर राष्ट्रपति का यह मानव रूपी लोगों के लिए किसी भी तरह से कम नहीं था।

काफ़िले के साथ लौट रही थी

वरे, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आख़िर आदित्यपुर स्थित राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान (एनआईटी) के 15वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम आयोजित होने के बाद जब वे अपने काफिले के साथ लौट रहे थे, तब सरायकेला-खरसावां जिले के आकाशवाणी चौक के निकट अचानक उनका काफिला रुका। इसी दौरान राष्ट्रपति ने कार से उतरकर सड़क किनारे स्थित आम जनता से मुलाकात का फैसला लिया।

लोगों को नहीं हुआ विश्वास
यह दृश्य शान्त था, लेकिन अत्यधिक मनमोहक भी। सड़क के दोनों ओर के लोग जैसे विश्वास ही नहीं कर पा रहे थे कि देश के प्रथम नागरिक उनके सबसे करीब हैं। “भारत माता की जय” और “जय झारखंड” के नारों से पूरब का नारा। राष्ट्रपति ने हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया, बच्चों से बात की और उन्हें स्नेह से टॉफी भी दी। कुछ दूर तक पैदल चलकर आम जनता से सीधा संवाद किया गया।

हालाँकि यह अस्थायी जनसंवाद के निर्धारित पैनल से अलग था, लेकिन सुरक्षा एड्स और स्थानीय प्रशासन ने तत्परता से दिखाया कि पूरे दरवाजे पूरी तरह से सुरक्षित रखे गए हैं। राष्ट्रपति के इस कदम से न केवल सुरक्षा व्यवस्था की शुरुआत हुई, बल्कि लोकतंत्र की जड़ें भी और मजबूत हुईं।

लोगों के लिए था ऐतिहासिक मंदिर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह व्यवहार उनके सहज, सरल और आकर्षक व्यक्तित्व का उदाहरण है। वे यह साबित कर सकते हैं कि सर्वोच्च पद पर व्यक्ति भी आम जनता के दुख-सुख, भावना और उत्साह से सीधे जुड़ सकता है। यह पल सिर्फ एक मुलाकात नहीं थी, बल्कि सत्ता और जनता के बीच की दूरी को ऐतिहासिक क्षण बना गया। कम्युनिस्ट पार्टी की धरती पर यह घटना लोकतंत्र में विश्वास को और गहरा करती है और लोगों की शहादत में राष्ट्रपति के प्रति सम्मान को लेकर कई हैं गुल्ला बढ़ाया गया है.

लेखक के बारे में

अमित रंजन

मैंने अपने 12 वर्षों के इतिहास में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और डेली भास्कर, डेली दैनिक भास्कर, डेली भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक लॉन्च हुआ। अंतिम तिथि से ले…और पढ़ें

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बहुमत में राष्ट्रपति मुर्मू का वो ऐतिहासिक क्षण जो ऐतिहासिक पल बन गया

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