PHOTOS: कोटा में पारा 46 के पार, टाटा जू में दहाड़ रहे परेशान ‘शेर खान’
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बाहुबली के प्रचंड हीट ने इस बार जंगल के राजा ‘शेरखान’ को भी बेबस कर दिया है। 46 डिग्री पार तापमान में टाटा जू के शेर, बाघ और भालू बार-बार पानी के टैब में राहत की तलाश में हैं। कभी दहाड़ते, कभी छांव में छिपते और कभी पानी में लेटते इन सामानों का बदला हुआ अंदाज अब लोगों का ध्यान खींच रहा है। गर्मी से बचाव के लिए जू प्रबंधन ने चॉकलेट, छोटे एसी, पारा और कृत्रिम फव्वारों तक का समाधान किया है।
बहुमत में प्रचंड गर्मी का खतरा जारी है और तापमान 46 डिग्री के पार पहुंच गया है। भीषण गर्मी का असर अब इंसानों के साथ-साथ टाटा जू के बेजुबान पर भी साफ दिखाई देने लगा है। चिलचिलाती धूप और गर्म समुद्र तट के बीच शेर और बाघ अपने बच्चों से बाहर की सुंदरता ही फिर छांव और पानी की तरफ भाग रहे हैं। कई जानवर घड़े पानी के टैब में बैठे नजर आ रहे हैं। वहीं जू मैनेजमेंट को हीट स्ट्रेस से बचने के लिए लगातार ठंडा पानी, ग्लूकोन-डी, एंटी स्ट्रेस दवाएं और विशेष देखभाल का सहारा लेना पड़ रहा है।

विशेष रूप से जू में शेर, बाघ, भालू और अन्य जानवरों पर गर्मी का असरदार प्रभाव देखा जा रहा है। दावों से साफ पता चल रहा है कि वे भी तेज गर्मी से परेशान हैं। हालाँकि, जेयू मैनेजमेंट ने गर्मी से राहत देने के लिए विशेष रियायतें दी हैं।

टाटा जू प्रबंधन द्वारा प्लांट को हीट से बचाने के लिए विशेष तैयारी की गई है। जू के अलग-अलग बोर्डों में स्टॉकिंग्स। पिय्री और छोटे एसिकॉटल लगे हुए हैं। ताकि स्टॉक को नियंत्रित किया जा सके और स्टॉक को राहत मिल सके।
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जू में शेर और बाघ काफी परेशान दिख रहे हैं। तेज गर्मी से परेशान शेर और बाघ बार-बार दहाड़ते नजर आ रहे हैं। पेड़ों से बाहर की आकृतियाँ ही चिलचिलाती धूप की वजह से वे तुरंत छाँव और पानी की ओर लौट जाती हैं।

शेर, बाघ और भालू बार-बार पानी के टेबल पर बने हुए हैं। वे कभी पानी में मस्ती भरी हरकतें करते हैं तो कभी कहीं लेटकर गर्मी से राहत लेते नजर आते हैं। जू प्रबंधन के अनुसार इन दिनों दिन में 2 से 3 बार नहलाया जा रहा है।

कारखाने के खाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इन्हें ठंडा पानी, ठंडे पदार्थ, ग्लूकोन-डी और अन्य ठंडे पेय पदार्थ दिये जा रहे हैं। ताकि शरीर में पानी और नमक की कमी न हो और वे हीट स्ट्रेस से बच जाएं।

शाकाहारी पशु और पक्षी के लिए अलग-अलग व्यवस्था दी गई है। उनके बाज़ों में पुआल बिछाया गया है। इस पुअल को बार-बार बेचा जा रहा है। जिससे कि आसपास तापमान कम हो और ठंड महसूस हो।

जू के प्रबंधन प्रबंधन खुद के स्वामित्व वाले सुपरमार्केट के माध्यम से सभी स्टॉक पर नज़र रख रहे हैं। जैसे किसी जानवर में थकान। ख़राब या परेशानी के लक्षणदिखाई देते हैं। इंस्टिट्यूट की टीम कंपनी पर उसकी जांच और देखभाल करती है।

एक तरफ जहां गर्मी से जानवर पानी के टैब में पर्यटक राहत ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर गर्मी के कारण टाटा जू में सैलानियों की संख्या में भारी कमी आई है। सामान्य दिनों के ऑब्जेक्टिव केवल लगभग 20% सैलानी ही जू पहुंच रहे हैं।

जू में घूम रहे सैलानियों का कहना है कि इस भीषण गर्मी में जानवर किस तरह रह रहे हैं। यह देखना जरूरी है. कई सैलानी हीट की स्केल में परिवार के साथ टाटा जू पहुंच रहे हैं और बच्चों की चोट की स्थिति और उनकी देखभाल के बारे में बता रहे हैं।

टाटा जू के संचालक नदीम अख्तर के मुताबिक इस बार प्रचंड हीट को देखने से पहले ही तैयारी कर ली गई थी। फूस के बाड़ों में. 4. छोटा एसी. डेज़र्ट और कृत्रिम पानी के फव्वारे लगाए गए हैं। ताकि तापमान कम हो जाए.

जू के विचारकों का कहना है कि इस तरह की भीषण गर्मी का पहले ही अनुमान लगाया जा चुका है। लेकिन जैसे ही गर्मी शुरू होती है. वे पहले से ही प्रिकॉशन लेना शुरू कर देते हैं। फोर्म को एंटी स्ट्रैस प्लांट दवा दी जा रही है।

यह विधि तनाव कम करने के साथ-साथ शरीर में नमक की कमी को भी पूरा करती है। ये आहार उनके खाने और पानी में पूरे दिए जा रहे हैं। विद्वानों का मानना है कि अब तक किसी भी जानवर में हीट स्ट्रोक या डिहाइड्रेशन जैसा गंभीर मामला सामने नहीं आया है।
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