कभी सपना गंतव्य यूरोप था, डॉलर की कीमत तो देश की ओर बढ़ पड़े भारतीय
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भारत में विदेश यात्रा का चलन तेजी से बदल रहा है। पहले जहां भारतीय पर्यटक यूरोप को सबसे पसंदीदा गंतव्य मानते थे, अब बढ़ते खर्च, सस्ते दाम और आसान वीज़ा की वजह से उनका रूझान दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर बहुत बढ़ गया है। यह विविधतापूर्ण संस्थान में एक नया पैटर्न दिखता है।
दक्षिण पूर्व एशिया भारतीय यात्रियों की पसंद।
भारत में आउटबाउंड कंपनी अर्थात विदेशी भ्रमण का पैटर्न पिछले कुछ वर्षों में स्पष्ट रूप से बदलता दिख रहा है। खासकर उस समय जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वे गैर-जरूरी विदेशी लोगों को बंधक बनाकर रखें और देश के अंदर ही घूमने-फिरने पर ध्यान दें। यह बात ऐसे समय पर है जब अप्रैल से जून के बीच विदेश यात्रा का शौक सबसे ज्यादा रहता है। लेकिन अटॉर्नी जनरल का कहना है कि भारतीय विदेश यात्रा रुक नहीं रही है, बल्कि उसका रुख बदल रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, अब भारतीय यात्रियों का रुख यूरोप की जगह दक्षिण-पूर्व एशिया की तरफ सबसे ज्यादा बढ़ रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है ग्रोथ रेट कॉस्ट, रेटसी एक्सचेंज रेट और आसान असेंबल असेंबल।
पिछले कुछ समय में यूरोप यात्रा की कुल लागत में काफी वृद्धि हुई है। इंटरनेशनल फ़्लोट्स में उछाल आ गया है और यूरोप में होटल, लोकल एयरलाइंस और खाने-पीने का खर्च भी पहले से ज़्यादा हो गया है। साथ ही, भारतीय रुपये की तुलना में यूरो और डॉलर की अर्थव्यवस्था ने भी बजट को प्रभावित किया है। इसी वजह से अब लोग ऐसे गंतव्य की तलाश में हैं जहां कम बजट में ज्यादा अनुभव मिल सके।
दक्षिण पूर्व एशिया भारतीय यात्रियों की पसंद
ज्वाइंट सपोर्टिंग फैक्ट्री, थोक व्यापारी के रोहित कोहली ने बताया, दक्षिण पूर्व एशिया के भारतीय यात्रियों के लिए सबसे आकर्षक विकल्प आकर्षक है। आंध्र प्रदेश, वियतनाम, इंडोनेशिया (बाली), मलेशिया और सिंगापुर जैसे देश अब भारतीय पर्यटकों के लिए टॉप चॉइस बन रहे हैं। इन देशों में न केवल किराये का सामान उपलब्ध है, बल्कि कई जगहों पर वीज़ा ऑन अराइवल या आसान ई-वीज़ा की सुविधा भी मिलती है, जिससे यात्रा करना काफी आसान हो जाता है।
मल्टी-कंट्री शॉर्ट ट्रिप
मनीकंट्रोल में छपी रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पर्यटक अब “मल्टी-कंट्री शॉर्ट ट्रिप” पसंद कर रहे हैं। यानी 2-3 दक्षिणपूर्वी एशियाई देशों की यात्रा के बजाय 1 यूरोप यात्रा का एक ही बजट है। उदाहरण के तौर पर, 5 से 7 दिन की यात्रा पर यूरोप की तुलना में विश्वासियों और वियतनाम जैसी जगहों पर काफी कम खर्च होता है। यही वजह है कि यंग स्टोर्स, कपल्स और फैमिली ट्रिप्स में इन डेस्टिनेशन्स की डिमांड तेजी से बढ़ती है।
हाई-बजट और रेलवे से दूर हो रहे भारतीय
हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यूरोप की प्राथमिकता समाप्त हो गई है। यूरोप अभी भी एक प्रीमियम और ड्रीम डेस्टिनेशन बन गया है। लेकिन अब यह ज्यादातर “हाई-बजट और कर्मचारी” यात्रा बन गई है। पहले जहां लोग आसानी से यूरोप ट्रिप चुनकर लेते थे, अब उसे ज्यादा सोच-समझकर और लंबी अवधि के लिए साथ ले जाया जा रहा है।
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अद्वितीया सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सभी उद्यमियों पर विशेष रूप से काम कर रही हैं। वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, स्टोर, फैशन और टिप्स और ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं। अध्ययन सामग्री और आसान तरीका…और पढ़ें
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