Microfinance companies: महिलाएं सुरक्षा को लेकर डरी हुई हैं

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Microfinance companies: झारखंड के छतरपुर प्रखंड में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्मी ग्रामीण महिलाओं को प्रताड़ित कर रहे हैं। किस्त जमा नहीं करने पर महिलाओं को घर से उठा ले जाते हैं, गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करते हैं, गहने छीन लेते हैं। महिलाओं के घर में खाना तक नहीं बनने देते हैं, घरेलू सामान उठा ले जाते हैं। पुलिस में शिकायत करने पर राशन बंद करने की धमकी देते हैं। महिलाएं जान-माल की सुरक्षा को लेकर डरी हुई हैं। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का ग्रामीण महिलाओं पर आतंक

  • माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का ग्रामीण महिलाओं पर आतंक
  • किस्त जमा नहीं करने पर महिलाओं को घर से उठा ले जाते हैं
  • महिलाओं के घर में खाना तक नहीं बनने देते
  • महिलाएं जान-माल की सुरक्षा को लेकर डरी हुई हैं

झारखंड के छतरपुर प्रखंड में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्मी ग्रामीण महिलाओं पर आतंक मचाए हुए हैं। इन कंपनियों के कर्मी भोले-भाले ग्रामीणों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर लोन देते हैं। जब समय पर लोन की किस्त जमा नहीं होती, तो कंपनी के कर्मी लोगों को प्रताड़ित करते हैं।

किस्त जमा नहीं करने पर महिलाओं को घर से उठा ले जाते हैं

Microfinance companies: कंपनी के कर्मी किस्त जमा नहीं करने वाली महिलाओं को घर से उठा ले जाते हैं। उन्हें गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार करते हैं। उनके गहने तक छीन लेते हैं। पिछले सप्ताह प्रखंड के तेनुडीह गांव में किस्त न चुका पाने वाली एक महिला को कर्मी जबरन उठा कर बैंक तक ले गये और वहां उसे परेशान किया।

Microfinance companies: घर में खाना तक नहीं बनने देते हैं कंपनी के कर्मी

लोन लेने वाली ज्यादातर महिलाएं मजदूरी करती हैं। चूंकि इनके घर के पुरुष सदस्य कमाने के लिए दूसरे राज्यों या शहरों में रहते हैं, ऐसे में इन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। समय पर मजदूरी का पैसा नहीं मिलने की वजह से जब महिलाएं समय पर किस्त नहीं चुका पाती हैं, तो इन्हें कई तरह की यातनाएं सहनी पड़ती हैं।

भुक्तभोगी महिलाओं के अनुसार, किस्त नहीं चुका पाने पर फाइनेंस कंपनी के कर्मी घर में खाना भी नहीं बनने देते। कंपनी के कर्मी दरवाजा, घरेलू सामान, गैस सिलिंडर व चौकी आदि भी उठा ले जाते हैं। वे महिलाओं के जेवर तक उतरवा लेते हैं। पुलिस में शिकायत करने पर राशन बंद कर देने की धमकी दी जाती है। पैसा नहीं रहने पर कई महिलाएं फाइनेंस कर्मियों की दहशत के कारण घर छोड़कर भाग जाती हैं।

Microfinance companies: क्या कहती हैं भुक्तभोगी महिलाएं

भुक्तभोगी महिलाओं ने बताया कि फाइनेंस कंपनी का लोन चुकाने के लिए गांव में ही 10 प्रतिशत ब्याज पर पैसे लेकर देने पड़ते हैं। कंपनी के कर्मियों की दहशत ऐसी है कि पैसा नहीं रहने पर तय तारीख की सुबह कर्मियों के आने के पहले महिलाएं घर छोड़कर भाग जाती हैं। जब लोन लेने वाली महिलाएं घर पर नहीं मिलती हैं, तो कंपनी के कर्मी गाली-गलौज करते हैं और उनके घर का छप्पर भी तोड़ डालते हैं।

ये कंपनियां करती हैं फाइनेंस का काम

ग्रामीण कोटा, सुगनिया, आरबीएल, भाया, फिजन, बीएसएस, कैसपर, सिंदुरिया, समस्त फाइनांस कंपनी

थाने में की शिकायत पर नहीं हुई कोई कार्रवाई

Microfinance companies: महिलाओं ने इस संबंध में थाना प्रभारी को आवेदन देकर जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगायी है। हालांकि, पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। छतरपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अजय कुमार ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कर फाइनांस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

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