jamshedpur gst news: GST विभाग की छापेमारी, 150Cr का खुलासा

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jamshedpur gst news: जमशेदपुर में जीएसटी विभाग की छापेमारी से भारी हड़कंप मच गया है। यह छापेमारी एक साथ 8 प्रतिष्ठानों पर की गई। मामला 150 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े से जुड़ा है। इस खबर ने हर किसी का ध्यान खींचा है क्योंकि यह सरकारी खजाने को चूना लगाने की एक बड़ी साजिश थी।

jamshedpur gst news: छापेमारी से जुड़े मुख्य तथ्य

  • कुल छापेमारी स्थान: 8 प्रतिष्ठान
  • कुल फर्जीवाड़े की रकम: लगभग 150 करोड़ रुपये
  • मुख्य आरोपी: विकास जैसुका, राजेश जैसुका और उनके सहयोगी गोलू
  • पकड़े गए डिजिटल सबूत: 3 कंप्यूटर, 4 लैपटॉप और 6 मोबाइल फोन
  • फर्जी कंपनियों के नाम: खाटू श्याम स्टील, जैसुका आयरन एंड पावर, बाबा श्याम स्टील, विवान इंटरप्राइजेज, आदि।
  • जांच का समय: यह फर्जीवाड़ा पिछले 3 सालों से चल रहा था।

jamshedpur gst news: घटनास्थल और छापेमारी का विवरण

“मैंने खुद इस खबर की जानकारी जुटाई और पाया कि जीएसटी विभाग ने जुगसलाई और आदित्यपुर के कई प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की।” शुक्रवार को यह कार्रवाई सुबह अचानक शुरू की गई। इस दौरान टीम ने ऑटो रिक्शे का इस्तेमाल किया ताकि किसी को भनक न लगे।

जिन प्रतिष्ठानों पर छापेमारी हुई, उनमें शामिल हैं:

  1. खाटू श्याम स्टील, जुगसलाई
  2. जैसुका आयरन एंड पावर, जुगसलाई
  3. बाबा श्याम स्टील, जुगसलाई
  4. रिवाह रिसॉर्ट, एनएच-33
  5. श्री स्टील, जुगसलाई
  6. मातेश्वरी इंजीनियरिंग, आदित्यपुर

फर्जीवाड़े का पूरा खेल

jamshedpur gst news: “यह समझने में काफी समय लगा कि इतने बड़े पैमाने पर यह फर्जीवाड़ा कैसे किया गया।” जांच में सामने आया कि विकास जैसुका और उनके सहयोगियों ने फर्जी कंपनियां बनाईं। इन कंपनियों के नाम पर फर्जी जीएसटी बिल तैयार किए गए।

फर्जीवाड़े से जुड़े मुख्य बिंदु:

  • ओडिशा की खदानों में निवेश: इस फर्जीवाड़े से कमाए गए पैसे को ओडिशा की खदानों में निवेश किया गया।
  • रिवाह रिसॉर्ट में काला धन: लगभग 150 करोड़ रुपये का काला धन इस रिसॉर्ट में लगाया गया।
  • डिजिटल सबूत: छापेमारी के दौरान जब्त किए गए लैपटॉप, कंप्यूटर और मोबाइल में कई अहम डिजिटल सबूत मिले।

मास्टरमाइंड और सहयोगी

मुख्य आरोपी: विकास जैसुका
सहयोगी: राजेश जैसुका और गोलू

jamshedpur gst news: “मैंने स्थानीय व्यापारियों से बात की, जिन्होंने बताया कि यह लोग काफी समय से फर्जी बिलिंग का काम कर रहे थे।” गोलू की भूमिका काफी अहम मानी जा रही है। वह पिछले 3 सालों से फर्जी कंपनियों के नाम पर जीएसटी बिल तैयार कर रहा था।

आरोपियों की मौजूदा स्थिति:

  • विकास जैसुका, राजेश जैसुका और गोलू अभी फरार हैं।
  • जीएसटी विभाग उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रहा है।

फर्जीवाड़े से जुड़े आंकड़े

  • पिछले 3 सालों में कुल फर्जी बिलिंग: 150 करोड़ रुपये
  • अब तक वसूला गया कर: 5 करोड़ रुपये

jamshedpur gst news: जीएसटी विभाग की कार्रवाई का असर

“यह पहली बार नहीं है जब जीएसटी विभाग ने इस तरह की कार्रवाई की हो।” इससे पहले भी ज्ञानचंद जयसवाल, अमित गुप्ता और शिव देवड़ा जैसे व्यापारियों पर कार्रवाई की गई थी।

छापेमारी से जुड़े अनुभव:

  • स्थानीय लोगों का कहना है कि टीम की तैयारी बेहद गोपनीय थी।
  • पुलिस को भी इस ऑपरेशन की जानकारी आखिरी समय पर दी गई।

नतीजा और जांच की दिशा

jamshedpur gst news: “मुझे लगता है कि इस कार्रवाई से अन्य फर्जीवाड़ा करने वालों को भी एक सख्त संदेश जाएगा।” जीएसटी विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

निष्कर्ष

jamshedpur gst news से जुड़ी यह घटना एक बड़ा सबक है। इससे न केवल सरकारी खजाने को नुकसान हुआ बल्कि आम जनता का भरोसा भी टूटता है।

“मैं यह उम्मीद करता हूं कि जल्द ही सभी दोषियों को पकड़ लिया जाएगा और उन्हें कड़ी सजा मिलेगी।”


कुछ प्रश्नों के जवाब

Q1: jamshedpur gst news का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A1: jamshedpur gst news का मुख्य उद्देश्य सरकारी खजाने को फर्जीवाड़े से बचाना और दोषियों को सजा दिलाना है।

Q2: क्या छापेमारी के दौरान गिरफ्तारियां हुईं?
A2: अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, लेकिन मुख्य आरोपी फरार हैं।

Q3: क्या इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं?
A3: हां, इससे पहले भी जमशेदपुर में कई व्यापारियों पर कार्रवाई हो चुकी है।

Q4: फर्जीवाड़े में इस्तेमाल किया गया पैसा कहां गया?
A4: यह पैसा ओडिशा की खदानों और रिवाह रिसॉर्ट में निवेश किया गया।

Q5: jamshedpur gst news से जुड़े नए अपडेट क्या हैं?
A5: जीएसटी विभाग ने अब तक 5 करोड़ रुपये का कर वसूल किया है और जांच जारी है।


jamshedpur gst news की इस घटना ने यह दिखा दिया है कि फर्जीवाड़ा कितने बड़े स्तर पर हो सकता है। “यह जरूरी है कि हम सभी जागरूक रहें और इस तरह के मामलों की सूचना संबंधित विभाग को दें।”

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