झारखंड में शिक्षा की बदहाल तस्वीर: 100 स्कूलों में जीरो छात्र, 9700 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे

Jharkhand school education system
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रांची: झारखंड में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी सच्चाई एक बार फिर सामने आई है। शिक्षा विभाग की यू-डायस प्लस (U-DISE Plus) 2025-26 रिपोर्ट के विश्लेषण में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं । यह Jharkhand school education system की बदहाल तस्वीर को उजागर करती है।

राज्य के 44,311 स्कूलों में से 100 से अधिक स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है, जबकि 9,700 से ज्यादा स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं । आइए जानते हैं इस Jharkhand school education system की वास्तविक स्थिति से जुड़े हर अहम पहलू।

Jharkhand school education system: 100 से अधिक स्कूलों में जीरो छात्र

Jharkhand school education system के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर उन 100 से अधिक स्कूलों का क्या होगा जहां एक भी छात्र नहीं है।

शून्य नामांकन का संकट

Jharkhand school education system

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के 44,311 स्कूलों में से 100 से अधिक ऐसे स्कूल हैं जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है । यह स्थिति या तो इन स्कूलों के बंद होने या फिर उनके पुनर्गठन की मांग करती है। इन स्कूलों में बुनियादी ढांचा मौजूद है, लेकिन छात्रों की कमी के कारण ये संसाधन बेकार पड़े हैं।

Jharkhand school education system: 9700 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे

Jharkhand school education system की सबसे गंभीर समस्या शिक्षकों की भारी कमी है।

एक शिक्षक पर पूरा स्कूल

करीब 10 हजार स्कूलों में एक ही शिक्षक होने की स्थिति शिक्षा की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है । ऐसे स्कूलों में एक शिक्षक को कई कक्षाओं को एक साथ संभालना पड़ता है, जिससे बच्चों की बुनियादी पढ़ाई तक प्रभावित होती है। ग्रामीण और सुदूर इलाकों में यह समस्या और भी गंभीर है।

शिक्षक-छात्र अनुपात बिगड़ा

एक शिक्षक पर सैकड़ों छात्रों का बोझ होने से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना लगभग असंभव हो जाता है। इस Jharkhand school education system में शिक्षकों की नियुक्ति और उनके प्रशिक्षण पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

Jharkhand school education system: भवन और कक्षाओं का संकट

Jharkhand school education system के सामने बुनियादी ढांचे का संकट भी गंभीर है।

बिना भवन के स्कूल

रिपोर्ट के अनुसार, 50 से अधिक स्कूल बिना भवन के संचालित हो रहे हैं । कई जगह बच्चे पेड़ के नीचे या अस्थायी शेड में पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा का अधिकार कानून के बावजूद यह स्थिति शर्मनाक है।

बिना क्लासरूम के स्कूल

वहीं 450 से अधिक स्कूलों में पर्याप्त कक्षाएं नहीं हैं, जिससे एक ही कमरे में कई कक्षाएं चलती हैं । इससे पढ़ाई का माहौल खराब होता है और बच्चों का ध्यान भटकता है।

Jharkhand school education system: बिजली, पानी और शौचालय का अभाव

Jharkhand school education system में बुनियादी सुविधाओं की कमी बच्चों, खासकर बालिकाओं की शिक्षा में बाधा बन रही है।

सुविधास्कूलों की संख्या (जहां सुविधा नहीं)
बिजली1,950
शौचालय500 से अधिक
पेयजल670 से अधिक

बिजली की कमी

1,950 स्कूलों में बिजली नहीं है । इस वजह से डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लास की योजना प्रभावित हो रही हैं।

शौचालय और पेयजल का अभाव

500 से अधिक स्कूलों में शौचालय नहीं है, जिससे बालिकाओं की उपस्थिति पर असर पड़ रहा है । वहीं, 670 से अधिक स्कूलों में पेयजल की सुविधा नहीं है ।

Jharkhand school education system: जिलेवार स्थिति

Jharkhand school education system के विभिन्न जिलों में स्थिति अलग-अलग है।

जिलास्कूलों की संख्यामुख्य समस्या
दुमका2,553पानी और शौचालय की कमी
पाकुड़1,145संसाधनों की भारी कमी
साहिबगंज1,533बुनियादी सुविधाओं का अभाव
लातेहार1,224शिक्षक और भवन दोनों की कमी
रांची3,285नामांकन सबसे ज्यादा, लेकिन सुविधाओं की कमी
गिरिडीह3,837संसाधनों का असमान वितरण
पलामू2,900दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षक और सुविधा की कमी

Jharkhand school education system: ग्रामीण और आदिवासी इलाके सबसे प्रभावित

Jharkhand school education system में ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों की स्थिति सबसे खराब है।

दूरदराज के जिलों में संकट

गुमला, सिमडेगा, पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों में शिक्षक की कमी सबसे अधिक है। इन क्षेत्रों में स्कूलों में बिजली और पानी का अभाव है। शहरी जिलों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अब भी खराब हैं ।

Jharkhand school education system: निष्कर्ष

Jharkhand school education system की यह रिपोर्ट राज्य के शिक्षा प्रशासन के लिए एक वेक-अप कॉल है। 100 से अधिक स्कूलों में जीरो छात्र, 9700 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे, और हजारों स्कूलों में बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव – ये सभी आंकड़े बताते हैं कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में अभी लंबा सफर तय करना है । सरकार को चाहिए कि वह इन स्कूलों के पुनर्गठन, शिक्षकों की नियुक्ति और बुनियादी सुविधाओं के विकास पर तत्काल ध्यान दे, ताकि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

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