कोडरमा में जंगली हाथियों का आतंक: महिला समेत दो की मौत, इलाके में दहशत का माहौल |

Koderma wild elephant attack
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कोडरमा: झारखंड के कोडरमा जिले में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार (25 मार्च 2026) की रात हाथी के हमले में एक महिला और एक पुरुष की दर्दनाक मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है । यह Koderma wild elephant attack पिछले कुछ दिनों में हाथियों से हुई सबसे भीषण घटना है।

जानकारी के अनुसार, रात करीब 8 बजे मरियमपुर के पास हाथी देखा गया। इसी दौरान उसने एक महिला को कुचलकर मार डाला । आइए जानते हैं इस Koderma wild elephant attack से जुड़ी हर अहम बात, ग्रामीणों के आरोप और वन विभाग की तैयारियों के बारे में।

Koderma wild elephant attack: मरियमपुर में हाथी ने महिला को कुचला

Koderma wild elephant attack
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Koderma wild elephant attack का पहला शिकार एक महिला हुई।

पहली घटना

जानकारी के अनुसार, रात करीब 8 बजे मरियमपुर के पास हाथी देखा गया। इसी दौरान उसने एक महिला को कुचलकर मार डाला । घटना इतनी अचानक हुई कि महिला कुछ समझ पाती, इससे पहले ही हाथी ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई।

Koderma wild elephant attack: बोनाकाली में दूसरी घटना

Koderma wild elephant attack की दूसरी घटना बोनाकाली महिला कॉलेज के पास हुई।

दूसरी घटना

घटना के बाद जब स्थानीय लोग हाथी को भगाने का प्रयास कर रहे थे, तभी वह बोनाकाली महिला कॉलेज के पास पहुंच गया, जहां 40 वर्षीय बालेश्वर सोरेन (पिता- छोटका सोरेन) को भी कुचलकर मार डाला । बालेश्वर हाथी को भगाने के प्रयास में मौके पर मौजूद थे, तभी हाथी ने उन पर हमला कर दिया। यह Koderma wild elephant attack की दूसरी दर्दनाक घटना थी।

Koderma wild elephant attack: इलाके में भय का माहौल

Koderma wild elephant attack

Koderma wild elephant attack के बाद कोडरमा नगर पंचायत क्षेत्र के बोनाकाली और मरियमपुर इलाके में भय का माहौल बना हुआ है।

लोग घरों से निकलने से डरे

लोग घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं । रात के समय लोग सतर्क हैं और कोई भी जोखिम नहीं लेना चाहता। घटना के बाद से ही पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा है।

वन विभाग की टीम मौके पर

सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन हाथी को ज्यादा दूर तक खदेड़ने में सफल नहीं हो सकी । विभाग की टीम हाथियों पर नजर रखे हुए है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है।

Koderma wild elephant attack: अभी भी जंगल में छिपा है हाथी

Koderma wild elephant attack

Koderma wild elephant attack के बाद भी खतरा टला नहीं है।

बिछड़ा हुआ हाथी

स्थानीय लोगों के अनुसार, एक हाथी अभी भी मरियमपुर से सटे जंगलों में छिपा हुआ है, जबकि हाथियों का एक झुंड बागीटांड के पास कोडरमा घाटी के जंगलों में देखा गया है । बताया जा रहा है कि एक हाथी झुंड से बिछड़ा हुआ है जो आतंक मचा रहा है ।

कभी भी हो सकता है हमला

ग्रामीणों में अभी शंका है कि किसी भी समय हाथी फिर से हमला कर सकते हैं । रात के समय हाथियों का हमला होना और भी खतरनाक साबित हो सकता है।

Koderma wild elephant attack: ग्रामीणों ने वन विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप

Koderma wild elephant attack के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

संसाधनों की कमी

ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि टीम के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं । टॉर्च के सहारे हाथी को भगाने की कोशिश नाकाफी साबित हो रही है । उनका कहना है कि वन विभाग को हाथियों को भगाने के लिए आधुनिक उपकरण और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराना चाहिए।

समय पर कार्रवाई नहीं

ग्रामीणों का आरोप है कि समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण यह हादसा हुआ। यदि पहले ही हाथियों को खदेड़ दिया जाता, तो दो जिंदगियां बच सकती थीं।

Koderma wild elephant attack: हाथी-मानव संघर्ष की पुनरावृत्ति

Koderma wild elephant attack ने एक बार फिर झारखंड में बढ़ते हाथी-मानव संघर्ष (Human-Elephant Conflict) पर सवाल खड़े किए हैं।

वनों के कटने से बढ़ा संकट

जंगलों के कटने और हाथियों के प्राकृतिक आवास के सिकुड़ने के कारण हाथी मानव बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। कोडरमा जिले में पिछले कुछ वर्षों में हाथियों के हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं।

स्थायी समाधान की जरूरत

इस घटना से एक बार फिर साबित होता है कि हाथियों के आतंक से निपटने के लिए एक स्थायी समाधान की आवश्यकता है। वन विभाग को चाहिए कि हाथियों के आवागमन के मार्गों को चिन्हित करें और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दें।

Koderma wild elephant attack: निष्कर्ष

Koderma wild elephant attack ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी है। मरियमपुर और बोनाकाली में हुई इन दो दर्दनाक मौतों ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है । वन विभाग पर लापरवाही के आरोप और अपर्याप्त संसाधनों की कमी ने ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ा दिया है । प्रशासन और वन विभाग को चाहिए कि वह हाथियों को भगाने के लिए प्रभावी कदम उठाएं और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करें। तब तक, इलाके के लोगों को सतर्क रहने और रात के समय घरों से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जाती है।

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