रांची में गैस आपूर्ति ठप होने से ‘डीजल’ से जल रहे होटलों के चूल्हे, छोटे दुकानदार कोयले पर निर्भर

Ranchi gas supply disruption
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रांची: शहर में गैस सिलिंडर की कमी अब होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर भारी पड़ने लगी है। कमर्शियल गैस की आपूर्ति लगभग ठप होने से संचालकों को वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ रहे हैं । यह Ranchi gas supply disruption अब एक बड़े संकट का रूप ले चुका है, जिससे न केवल कारोबार प्रभावित हो रहा है, बल्कि आम लोगों की जेब पर भी बोझ बढ़ रहा है।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि बड़े होटल अब डीजल से चलने वाली भट्ठी तैयार करा रहे हैं, जबकि छोटे होटल और ठेला संचालक कोयला और लकड़ी पर निर्भर हो गए हैं । आइए जानते हैं इस Ranchi gas supply disruption से जुड़ी हर अहम बात, वैकल्पिक व्यवस्था की लागत और इसके आर्थिक प्रभाव के बारे में।

Ranchi gas supply disruption: बड़े होटलों ने अपनाई डीजल भट्टी

Ranchi gas supply disruption

Ranchi gas supply disruption के कारण बड़े होटलों को महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है।

डीजल भट्टी की लागत

होटल संचालकों के अनुसार डीजल भट्टी गैस चूल्हे की तरह काम करती है, लेकिन इसे तैयार करने में 45 से 50 हजार रुपये तक का खर्च आता है । यह एक बार का निवेश है, लेकिन इसके बाद का परिचालन खर्च गैस की तुलना में काफी अधिक है।

डीजल की खपत और खर्च

एक लीटर डीजल में यह भट्ठी केवल आधे से एक घंटे तक ही चल पाती है, जिससे खर्च गैस की तुलना में अधिक हो रहा है । इसके बावजूद मजबूरी में बड़े होटल इसे अपना रहे हैं ताकि कारोबार जारी रखा जा सके । यह Ranchi gas supply disruption उनके लिए आर्थिक संकट बन गया है।

Ranchi gas supply disruption: छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा असर

Ranchi gas supply disruption का सबसे बुरा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ा है।

कोयला और लकड़ी का सहारा

Ranchi gas supply disruption

छोटे होटल, ढाबा और ठेला-खोमचा संचालक गैस नहीं मिलने के कारण कोयला और लकड़ी का सहारा ले रहे हैं । कई जगहों पर दुकानदारों ने बताया कि बढ़ती लागत और कम मुनाफे के कारण उन्हें दुकान बंद करने की नौबत आ रही है ।

प्रभावित इलाके

शहर के पुरूलिया रोड, सर्कुलर रोड, मेन रोड, रातू रोड, चुटिया और डोरंडा जैसे इलाकों में कई छोटे कारोबार प्रभावित हुए हैं । यह Ranchi gas supply disruption उनकी रोजी-रोटी को चुनौती दे रही है।

Ranchi gas supply disruption: कालाबाजारी और मेन्यू में 20% बढ़ोतरी

Ranchi gas supply disruption के बीच कालाबाजारी भी तेजी से बढ़ रही है।

महंगे दाम पर सिलेंडर

गैस संकट के बीच घरेलू और कमर्शियल सिलिंडरों की कालाबाजारी भी तेजी से बढ़ रही है । मजबूरी में होटल संचालक महंगे दाम पर सिलेंडर खरीद रहे हैं । इसका सीधा असर खाने-पीने की कीमतों पर पड़ा है।

मेन्यू में बढ़ोतरी

शहर के कई होटलों में मेन्यू की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक वृद्धि देखी जा रही है, वहीं कई आइटम मेन्यू से हटाए भी जा रहे हैं । यह Ranchi gas supply disruption आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डाल रही है।

Ranchi gas supply disruption: कोयले की कीमत दोगुनी

Ranchi gas supply disruption के कारण कोयले की मांग बढ़ने से उसकी कीमतों में भी भारी उछाल आया है।

कोयले के दाम

गैस के विकल्प के रूप में कोयले की मांग बढ़ने से इसकी कीमत भी दोगुनी हो गई है । पहले 20 किलो कोयला 150-160 रुपये में मिलता था, जो अब 250-260 रुपये तक पहुंच गया है । वहीं 40 किलो की बोरी 400-450 रुपये में बिक रही है ।

लिट्टी की कीमत में उछाल

Ranchi gas supply disruption

इसका असर लिट्टी जैसे आम खाद्य पदार्थों पर भी पड़ा है, जिसकी कीमत 30 रुपये से बढ़कर 50 रुपये प्रति जोड़ा हो गई है । गैस की कमी और बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की रसोई और बाहर खाने दोनों को महंगा बना दिया है ।

Ranchi gas supply disruption: आने वाले दिनों में और गंभीर स्थिति की आशंका

Ranchi gas supply disruption के मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

गैस सप्लाई बहाल न होने पर संकट और बढ़ेगा

अगर गैस की सप्लाई जल्द बहाल नहीं हुई, तो होटल और रेस्टोरेंट के साथ-साथ आम घरों में भी खाना बनाना मुश्किल हो जाएगा। पहले से ही डीजल और कोयले की बढ़ती कीमतें लोगों पर बोझ डाल रही हैं।

Ranchi gas supply disruption: निष्कर्ष

Ranchi gas supply disruption ने शहर के व्यवसाय और आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। बड़े होटलों से लेकर छोटे ठेला संचालक तक सभी इस संकट की चपेट में हैं । डीजल भट्टी और कोयले का सहारा लेना एक अस्थायी समाधान है, लेकिन इससे लागत बढ़ रही है और इसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है । कालाबाजारी और बढ़ती कीमतों ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं । प्रशासन और गैस कंपनियों को चाहिए कि वे इस संकट को गंभीरता से लें और जल्द से जल्द गैस की सप्लाई सामान्य करने के प्रयास करें। तब तक, आम आदमी को महंगाई की मार सहनी पड़ेगी।

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