Santhal Samaj का संघर्ष: क्या बच पाएगा उनका पवित्र मरांङ बुरू पर्वत?

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Santhal Samaj: मैं रांची के मुख्यमंत्री आवास पर खड़ा था, जहां Santhal Samaj के 51 प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की। उनकी मांग? मरांङ बुरू (पारसनाथ पर्वत) को उनका धार्मिक तीर्थ घोषित किया जाए। यह सिर्फ एक पहाड़ नहीं, बल्कि उनकी आस्था, संस्कृति और अधिकारों की लड़ाई है।

“हम सैकड़ों साल से मरांङ बुरू को भगवान मानते आए हैं। अब जैन समुदाय और सरकार इसे छीनना चाहती है!”
रामलाल मुर्मू, संथाल नेता


Santhal Samaj की 5 बड़ी मांगें

हमने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन दिया, जिसमें ये मुख्य बिंदु थे:

  1. धार्मिक स्थल का दर्जा: मरांङ बुरू को संथालों का तीर्थ घोषित किया जाए।
  2. कानून बने: आदिवासी धार्मिक स्थल संरक्षण अधिनियम लागू हो।
  3. ग्राम सभा को अधिकार: वन अधिकार कानून-2006 के तहत प्रबंधन की जिम्मेदारी स्थानीय लोगों को मिले।
  4. अवैध निर्माण हटे: जैन समुदाय द्वारा बनाए गए मंदिर-धर्मशाला ध्वस्त किए जाएं।
  5. राजकीय महोत्सव: मरांङ बुरू युग जाहेर पूजा को सरकारी मान्यता मिले।

कानूनी लड़ाई: Santhal Samaj के पक्ष में क्या है?

  • छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908: संथालों के पारंपरिक अधिकार मान्य।
  • वन अधिकार कानून-2006: ग्राम सभा को वन भूमि पर अधिकार देता है।
  • सुप्रीम कोर्ट केस नंबर 180/2011: आदिवासी अधिकारों को मजबूती।

लेकिन…
2 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने मरांङ बुरू को Eco-Sensitive Zone घोषित कर दिया, जिससे संथालों के अधिकार खतरे में पड़ गए।


Santhal Samaj: आंकड़े बोलते हैं

  • 51 सदस्य: संथाल प्रतिनिधिमंडल में झारखंड, ओडिशा, बंगाल और छत्तीसगढ़ के लोग शामिल।
  • 1908 से लड़ाई: 115 साल से चल रहा है यह संघर्ष।
  • 2023 का मेमोरेंडम: 5 जनवरी को जारी हुआ, जिसमें संथाल अधिकारों को नजरअंदाज किया गया।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

हेमंत सोरेन ने Santhal Samaj को आश्वासन दिया:
“हम आपकी मांगों को गंभीरता से देखेंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे।”
लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।


अगला कदम क्या है?

  • धरना-प्रदर्शन: अगर सरकार जल्दी कार्रवाई नहीं करती, तो Santhal Samaj बड़े आंदोलन की तैयारी में है।
  • सोशल मीडिया अभियान: #SaveMarangBuru ट्रेंड करवाने की योजना।

FAQs: Santhal Samaj और मरांङ बुरू

Q1: मरांङ बुरू कहाँ है?
A: झारखंड के गिरिडीह जिले में, पारसनाथ पहाड़ के नाम से भी जाना जाता है।

Q2: जैन समुदाय का इससे क्या संबंध है?
A: जैन धर्म में इसे सम्मेद शिखर माना जाता है, जबकि संथाल इसे अपना पवित्र स्थल मानते हैं।

Q3: क्या सरकार ने कोई एक्शन लिया है?
A: अभी तक सिर्फ आश्वासन मिला है, कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ।


निष्कर्ष: Santhal Samaj की आवाज बुलंद होगी!

मैंने देखा कि Santhal Samaj अपनी संस्कृति बचाने के लिए लड़ रहा है। सरकार को उनके अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। “हम हार नहीं मानेंगे!” — यही संदेश है संथाल समाज का।

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