झारखंड में विश्वविद्यालय और कॉलेज होंगे तंबाकू मुक्त, कुलपति-प्राचार्य की तय हुई जवाबदेही |

Tobacco-free universities Jharkhand
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रांची: झारखंड के सभी विश्वविद्यालय और अंगीभूत व संबद्ध कॉलेज अब सिगरेट और तंबाकू मुक्त परिसर होंगे। Tobacco-free universities Jharkhand को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, इन संस्थानों के लिए तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थानों के केंद्रीय दिशा-निर्देश लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है ।

इसके लिए पहली बार विश्वविद्यालय के मामले में कुलपति और डीन तथा कॉलेज के मामले में प्राचार्य की जवाबदेही तय की गई है । यह जवाबदेही विधानसभा में मंगलवार (17 मार्च 2026) को पारित झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 में की गई है । आइए जानते हैं Tobacco-free universities Jharkhand के इस अहम फैसले से जुड़ी हर अहम बात।

Tobacco-free universities Jharkhand: कॉलेज परिसर सिगरेट-तंबाकू उत्पादों से हो मुक्त

Tobacco-free universities Jharkhand

Tobacco-free universities Jharkhand सुनिश्चित करने के लिए नए विधेयक में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।

विधेयक के मुख्य प्रावधान

राज्यपाल की स्वीकृति के बाद लागू होने वाले अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक विश्वविद्यालय, अंगीभूत व संबद्ध महाविद्यालय यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय करेगा कि उसका परिसर सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के उपयोग, बिक्री और प्रचार से मुक्त हो ।

अधिकारियों की जिम्मेदारी

उक्त पदाधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि वह इससे संबंधित केंद्र व राज्य के दिशा-निर्देशों का सख्ती से कार्यान्वयन और निरंतर प्रवर्तन सुनिश्चित करे तथा परिसर को सिगरेट और तंबाकू मुक्त क्षेत्र बनाए रखे । इससे Tobacco-free universities Jharkhand का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।

Tobacco-free universities Jharkhand: 100 गज की परिधि तक लागू होगा प्रतिबंध

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Tobacco-free universities Jharkhand के तहत केवल कॉलेज परिसर ही नहीं, बल्कि उसके आसपास के इलाके में भी प्रतिबंध लगाया जाएगा।

सीओटीपीए अधिनियम के तहत अधिसूचना

प्रत्येक विश्वविद्यालय तथा कॉलेज की बाहरी सीमा से एक सौ गज की परिधि को सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध तथा व्यापार और वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम, 2003 (COTPA) के तहत अधिसूचित किया जाएगा ।

बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध

ऐसी परिधि के भीतर सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री या सेवन की अनुमति नहीं दी जाएगी । इससे Tobacco-free universities Jharkhand के आसपास के वातावरण को भी तंबाकू मुक्त बनाया जा सकेगा।

Tobacco-free universities Jharkhand: विधेयक में अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान

Tobacco-free universities Jharkhand के अलावा इस विधेयक में शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान भी किए गए हैं।

शिक्षक और कर्मचारी लड़ सकेंगे चुनाव

विश्वविद्यालय का कोई शिक्षक या कर्मचारी विधानसभा या संसद का चुनाव लड़ सकता है । हालांकि नामांकन दाखिल करने से पहले उसे विश्वविद्यालय से अनुमति लेनी होगी ।

निर्वाचित होने पर अवकाश

विधानसभा या संसद के सदस्य के रूप में निर्वाचित कोई शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी अपनी सदस्यता अवधि तक वेतन और भत्ता के बिना अवकाश का हकदार होगा । किसी शिक्षक या कर्मचारी को इस आधार पर पद पर बने रहने के लिए अयोग्य ठहराया नहीं जाएगा कि वह विधानसभा या संसद में निर्वाचित हुआ है ।

Tobacco-free universities Jharkhand: स्वास्थ्य के लिए ऐतिहासिक कदम

Tobacco-free universities Jharkhand की यह पहल राज्य के युवाओं और छात्रों के स्वास्थ्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम है।

युवाओं को तंबाकू से बचाना

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य युवाओं और छात्रों को तंबाकू और सिगरेट के दुष्प्रभावों से बचाना है। शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाकर उन्हें एक स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण प्रदान किया जा सकेगा।

अधिनियम का सख्ती से पालन

केंद्र सरकार का COTPA अधिनियम, 2003 पहले से ही लागू है, लेकिन इसके पालन में कमी रहती है। इस नए विधेयक में कुलपति और प्राचार्यों को सीधे तौर पर जवाबदेह बनाकर इस अधिनियम के पालन को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

Tobacco-free universities Jharkhand: निष्कर्ष

Tobacco-free universities Jharkhand की यह पहल राज्य के शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगी। कुलपति और प्राचार्यों को सीधे तौर पर जवाबदेह बनाकर सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि यह नियम सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर भी सख्ती से लागू हो । 100 गज की परिधि तक प्रतिबंध लगाने से कॉलेजों के आसपास के वातावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। यह विधेयक निश्चित रूप से झारखंड के युवाओं को एक स्वस्थ भविष्य देने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

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