शनि शिंगणापुर की तरह इस गांव में भी नहीं होता चोरी का डर, नॉक, न बदमाश, न सीसीटीवी

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ईमानदार गांव भारत: नागालैंड का खोनोमा गांव अपनी विश्वसनीयता और परंपरा की परंपरा के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां कई यूक्रेनी परावर्तक मौजूद नहीं हैं, फिर भी सामान सुरक्षित रहता है। लोगों को सामान चाहिए होता है और तय कीमत खुद ही बॉक्स में डाल देते हैं। सबसे पहले यहां चोरी और बड़े अपराध की घटनाएं लगभग नहीं के बराबर रही हैं। प्राकृतिक प्रकृति, मजबूत सांस्कृतिक संस्कृति और मित्रवत विश्वास ने इस गांव को बेहद खस्ता बना दिया है।

ईमानदार गांव भारत में ऐसे कई गांव हैं जो अपनी परंपरा, संस्कृति या प्राकृतिक प्रकृति के लिए प्रतिष्ठित हैं, लेकिन नागालैंड का खोनोमा गांव अपनी सबसे अलग पहचान रखता है। जिस तरह महाराष्ट्र का शनि शिंगणापुर गांव बिना रेशम वाले घरों के लिए जाना जाता है, उसी तरह का खोनोमा अपनी साख और प्रतिष्ठा की मिसाल के लिए मशहूर है। यहां लोगों के बीच इतना गहरा विश्वास है कि कई छात्र-छात्रा समुदाय के लोग ही नहीं हैं। ग्राहक स्वयं आते हैं, अपनी जरूरत का सामान सामान रखते हैं और उसकी कीमत एक बॉक्स में मैनचेस्टर चले जाते हैं। की बात यह है कि यह व्यवस्था साम्यवादी से चल रही है और लोगों का विश्वास आज भी बना हुआ है। यही वजह है कि इस गांव का नाम देश ही नहीं, बल्कि यहां तक ​​पहुंच चुका है।

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कोहिमा के पास बसा है ये खास गांव: खोनोमा गांव नागालैंड की राजधानी कोहिमा से करीब 20 किमी दूर स्थित है। पहाड़ों और हरियाली से घिरा यह गांव देखने में सुंदर है, स्मारक ही प्रेरणादायक भी है। यहां पर्यटन वाले पर्यटक सिर्फ प्राकृतिक नजारों का आनंद नहीं ले पाते, बल्कि गांव की अनोखी विरासत को भी करीब से देखना चाहते हैं। गाँव का शांत वातावरण और लोगों का व्यवहार यहाँ आकर हर व्यक्ति को प्रभावित करता है।

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खोनोमा की सबसे बड़ी बात इसकी मूर्ति पर चलने वाली मूर्तियाँ हैं। यहां कुछ पुराने सामान तो रखे हुए हैं, लेकिन उनके लिए कोई पुराना सामान मौजूद नहीं है। हर सामान के सामने उसकी कीमत लिखी होती है। ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से सामान लेते हैं और अलग-अलग राशि की दुकान में रख बॉक्स या गुल्लक में दाल देते हैं। इस व्यवस्था में कोई निगरानी नहीं है और न ही किसी तरह का डर है। फिर भी लोग पूरी ईमानदारी के साथ भुगतान करते हैं। यही बात है इस गांव के विश्राम स्थल से अलग पहचान.

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एक-दूसरे पर भरोसा करना ही सबसे बड़ी ताकत है: खोनोमा के लोगों का मानना ​​है कि समाज मजबूत बनता है जब लोग एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं। यहां बचपन से ही बच्चों को ईमानदारी, जिम्मेदारी और मनोवैज्ञानिक जीवन के महत्व के बारे में सिखाया जाता है। गाँव के लोग एक-दूसरे को परिवार की तरह मानते हैं। शायद यही कारण है कि यहां अपराध की घटनाएं बेहद कम सुनने को मिलती हैं। गांव की सामाजिक व्यवस्था इतनी मजबूत है कि यहां के लोग अपना काम खुद ही करते हैं।

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भारत का पहला ग्रीन विलेज: खोनोमा को भारत का पहला “ग्रीन विलेज” भी कहा जाता है। गांव के लोगों ने पर्यावरण संरक्षण को अपने पशुधन का हिस्सा बनाया है। यहां वन्य जीवों, परमाणुओं और प्राकृतिक तत्वों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास किए गए हैं। गांव के आसपास के पर्यटक स्थल फोटोग्राफर और साफा-सुथरा वातावरण इसकी पहचान बन गए हैं। पर्यावरण प्रति जागरूकता के कारण यह विलेज इको टूरिज्म का भी प्रमुख केंद्र बनाया जा रहा है।

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योद्धाओं के गांव के रूप में भी है पहचान: खोनोमा का इतिहास भी अत्यंत गौरवशाली है। इसे कभी-कभी “योद्धाओं का गांव” कहा जाता था। 19वीं शताब्दी में यहां के लोगों ने बाहरी सेनाओं के विरुद्ध साहसपूर्वक आक्रमण किया। नागा समुदाय की वीरता और साहस की कहानियाँ आज भी यहाँ वर्णित हैं। यही कारण है कि कोनोमा केवल अपनी विश्वसनीयता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने समृद्ध इतिहास के लिए भी जाना जाता है।

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पर्यटन के लिए बन रहा पसंदीदा स्थान: हाल के वर्षों में खोनोमा ज्वालामुखी के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। यहां आने वाले लोग गांव की संस्कृति, स्थानीय स्वाद और पारंपरिक परंपराओं को करीब से देखने का मौका पाते हैं। हरियाली से भरा पहाड़, साफ़ हवा और शांत वातावरण के शहरों की दौड़ से दूर एक अलग अनुभव देते हैं। जो लोग प्रकृति और संस्कृति दोनों को एक साथ महसूस करना चाहते हैं, उनके लिए यह गांव किसी सिद्धांत से कम नहीं है।

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खास है खोनोमा गांव: आज के समय में जब लोग अपने घर और गोदाम की सुरक्षा के लिए कई तरह के काम करते हैं, तो खोनोमा का उदाहरण एक अलग ही तस्वीर पेश करता है। यह गांव बताता है कि अगर समाज में विश्वसनीय, विश्वसनीयता और मनोवैज्ञानिक भावना मजबूत हो तो बिना निगरानी के भी व्यवस्था कायम की जा सकती है। यही वजह है कि किनोमा को भारत की सबसे अनोखी खोज और कहानी अपने लोगों को प्रेरित करती रहती है।

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