सीएम सोरेन का संकेत… 2 कांग्रेसी विधायकों को बुलाया, वित्त मंत्री करते रहे पशु
झारखंड की राजनीति किस दिशा में जा रही है, यह कोई समझ नहीं आ रहा है। राज्य में झारखंड लिबरेशन मोर्चा (राजदमी), कांग्रेस, राजद और वामपंथी गठबंधन की सरकार है। कांग्रेस और राजतन्त्र मंडल में भी शामिल हैं। वाम दल सरकार के समर्थन में तो हैं, पर सरकार में शामिल नहीं हैं। 12 कच्चे कांग्रेस वाली से राधाकृष्ण किशोर वित्त मंत्री हैं। उनके इन दिनों सरकार से खटपट चल रही है। उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यह गठबंधन सरकार की सेहत के लिए ठीक है तो नहीं, लेकिन सरकार के मुखिया सुशील सोरेन बेपरवाह हैं। राधाकृष्ण किशोर क्रोमा से लेकर दिल्ली तक रोना-धोना कर रहे हैं। आश्चर्य है कि उनकी इस पीड़ा को गठबंधन का कोई दल चयन से नहीं ले रहा है।
सुरक्षा दस्तावेज़ को वापस किया गया
राधाकृष्ण किशोर की सूची राज्य के पुलिस विभाग से है। अविश्वास की वजह भी कोई बहुत बड़ी बात नहीं है, लेकिन वित्त मंत्री ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। उन्होंने अपने सुरक्षा दस्तावेज के लिए रियासत से एक वाहन की मांग की थी। कहा गया था कि अभी भी उनके पास वाहन हैं, जिसमें ठूंस कर सुरक्षा परिषद् को शामिल किया जाता है। एक और गाड़ी मिल जाए तो सुरक्षा विभाग को कहीं आने-जाने में सुविधा होगी। रियासत ने अपनी बात अनसुनी कर दी। उसके बाद राधाकृष्ण किशोर का पारा 7वें स्काई पर चला गया। वे साजोसामान सुरक्षा उपकरणों में वापस आ गए। फिर भी किसी का ध्यान इस ओर नहीं गया. मुख्यमंत्री ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की और किसी राष्ट्र ने मान-मनौवल का कोई प्रयास नहीं किया।
खड़गे से दिल्ली में जगह
अपनी इस अजीब स्थिति से क्षुब्ध राधाकृष्ण किशोर दिल्ली पहुंच गए। मकसद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के सामने अपनी पीड़ा का इजहार करना था। वे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मिले। कहा तो यह कि उन्होंने झारखंड की विशेष स्थिति पर राष्ट्रपति से चर्चा की. पर, यह बात किसी के गले पर नहीं उतरती. अनुमान यही है कि उन्हें अपनी पीड़ा बताई जाएगी। खर्जे से क्या पासपोर्ट मिला, यह बात अभी बाहर नहीं है. इसका भी कोई संकेत नहीं मिला है कि पार्टी ने उन्हें इसी हाल में रहने को कहा है या फिर मंडप से मुक्ति दे देने की सलाह दी है।
क्या अनदेखी हो रही है
विशेष चर्चा की बात करें तो क्रिश्चियन सोरेन ने जान- मूर्ख कर राधाकृष्ण किशोर की अनदेखी बात है। पहलवान का ऐसा रुख शायद इसलिए भी है कि उनके दोनों हाथ अभी भी लोध हैं। नोएडा विधायक सरयू राय ने गैर कांग्रेस और गैर भाजपा सरकार बनाने का फार्मूला रसेल सोरेन को सुझाया है। उनका कहना है कि स्केटएम, राजद, वाम दल और अल्पसंख्यक दल को लेकर बहुमत का आंकड़ा पूरा हो जाएगा। कांग्रेस और भाजपा साथ हो जाएँ। पिछले कुछ महीनों से वह स्थिर विचारधारा की समर्थक हैं, जिसमें बीजेपी और इलेक्ट्रॉनिक्स की निष्ठा की बातें कही जा रही हैं।
प्रोग्राम का इनोवेशन नहीं
बीजेपी- परमाणु ऊर्जा निगम (बीजेपी) का एक स्पष्ट संकेत हाल ही में सामने आया है। समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन में समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन के बावजूद भी कांग्रेस पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इसे लेकर गठबंधन में खटपट शुरू हुई। अवलोकन को तो कांग्रेस ने अपनी चिंता की हार का ठीकरा पर फोड़ा, लेकिन असलियत सभी जानते हैं। दूसरे पर तोहमत उपयोग से अधिकांश पूर्वी राजद को ताकत पर कब्जा कर लिया गया था। कांग्रेस ने राजद पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप तो उन्होंने भी उस पर तोहमत लगा दी.
हो रही वित्त मंत्री की नजर
सरकार में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की नजर अब नजर आने लगी है। झारखंड में निवेश के लिए राज्य सरकार ने दिल्ली में बड़ा आयोजन किया है। मुख्यमंत्री पेट्रोलियम सोरेन सहित झारखंड का सरकारी अमला दिल्ली में है। राधाकृष्ण किशोर भी उस दौरान दिल्ली में मौजूद थे। पर, उन्होंने उपदेश नहीं दिया। पूछने पर उन्होंने बताया कि उन्हें डॉक्टर नहीं मिला था। इससे पहले जिला स्तर के बोर्ड में क्षेत्रीय भाषा के रूप में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को शामिल करने की वित्त मंत्री की सलाह को सरकार ने खारिज कर दिया था। ही नहीं, वित्त मंत्री को जलील करने के लिए डीएटीएम कोटे के कुछ उद्यमों ने भी आरोप लगाया है कि वित्त मंत्री के वित्त विभाग में वित्त मंत्री रोडे अटके हुए हैं।
मुक्ति की कोशिश तो नहीं
जब सरकार और मंत्री के बीच तल्खी इस स्तर तक आ जाए तो नतीजों का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। यह बात भी गलत है कि कांग्रेस के सहयोगी विधायकों के साथ सरकार में यही सलूक हो रहा है। कांग्रेस कोटे के 3 मंत्री रसेल सोरेन की सरकार में शामिल हैं. इनमें से तीन मंत्री राधाकृष्ण को पैग-पैग पर परेशानी है। दिल्ली के सरकारी कार्यक्रम में कांग्रेस कोटे के दोनों मंत्री तो मौजूद रहे, लेकिन दिल्ली में राधाकृष्ण न्योते का इंतजार करते रहे गए। विचार के लिए सुझाव काफी होता है. वे भी जरूर समझ रहे होंगे. उनके सामने अब 2 ही वे एक्ट्रेस नजर आ रही हैं। वे मंत्री पद छोड़ दें या इसी तरह सरकार में जलील होते रहें।














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