3 साल बाद अधिकमास में सोमवती सोनार का महासंयोग, एक उपाय से खुलेंगे पुण्य के द्वार!

authorimg
Share This Post


देवघर. सनातन धर्म में डायनामाइट की तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन जब भी सोमवार का दिन समाप्त होता है, तो उसे सोमवती प्लांटा कहा जाता है। वर्ष 2026 की पहली सोमवती ब्लास्टर अधिकमास अर्थात पूर्णिमा मास में पड़ रही है, जिसका महत्व और भी बढ़ गया है। धार्मिक सिद्धांतों के अनुसार, इस दिन पवित्र नदी या मठ में स्नान, दान-पुण्य, भगवान शिव की पूजा और पितरों का तर्पण करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

मान्यता है कि सोमवती विधि के दिन श्रद्धा और विधान से पूजा करने वाले भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा बनाकर रखते हैं। महिलाओं के लिए भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन व्रत और पूजा से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिष पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, इस समय पूर्णिमा मास चल रहा है और इस मास में सोमवती देवी को एक अत्यंत दुर्लभ घटना माना जाता है। उन्होंने बताया कि लगभग तीन साल में एक बार ऐसा मौका मिलता है, जब अधिक मास की खरीदारी सोमवार के दिन आती है। धार्मिक दृष्टि से यह संयोग बहुत शुभ और फलदायक माना जाता है।

जिस प्रकार पितृ पक्ष अपने-अपने लक्ष्यों को समर्पित माना जाता है, उसी प्रकार पितृ पक्ष में आने वाली आकाशगंगा भी पितरों की शांति और तृप्ति के लिए विशेष मणि जाती है। इस दिन पितरों के नाम से तिल, जल और सफेद पुष्प से निश्चिन्त होकर तर्पण करने से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही परिवार पर मौजूद पितृ दोष के प्रभाव को भी कम करने में सहायता मिलती है।

देवी-देवताओं के साथ पितृ भी धरती पर रहते हैं
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, प्रमुख मास का महत्व अन्य महीनों की तुलना में अधिक होता है। सिद्धांत यह है कि इस पूरे माह में देवी-देवताओं के साथ-साथ पितरों का भी विशेष प्रभाव पृथ्वी पर रहता है। इसलिए इस दौरान किए गए धार्मिक कार्य, दान, जप, तप और पूजा का कई गुणा अधिक फल प्राप्त होता है। विशेष रूप से बाइबिल तिथि बताए गए पुण्य कार्य व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आते हैं। जो लोग अपने स्मारक का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।

सोमवती की तिथि और शुभ उत्सव
वैदिक पंचांग के, ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की घोषणा तिथि 14 जून 2026 के अनुसार दोपहर 12 बजे 19 मिनट से शुरू होगी और 15 जून 2026 को सुबह 8 बजे 23 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर सोमवती देवी का व्रत और पूजा 15 जून, सोमवार को की जाएगी। इस दिन सुबह का स्नान, दान और पूजा-पाठ विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

अमृत ​​और भगवान गणेश सुबह 5 बजे 23 मिनट से लेकर 7 बजे तक 8 मिनट तक रहेंगे। इस शुभ समय में स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक, पितरों का तर्पण और लोगों को दान देने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होगी। धार्मिक मत के अनुसार, इस दिन पवित्र मन से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और उत्सव का आशीर्वाद लेकर आती है।

JharExpress is hindi news channel of politics, education, sports, entertainment and many more. It covers live breaking news in India and World

Post Comment

YOU MAY HAVE MISSED