गुप्त ख़ज़ाना बना पर्यटन संग्रहालय! भीनमाल में धर्म से साहसिक तक संभावित
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जालोर यात्रा समाचार: राजस्थान का जालोर जिला अब तेजी से पर्यटन मानचित्र पर उभर रहा है, और इसमें भीनमाल का एक प्रमुख आकर्षण बनता जा रहा है। यह क्षेत्र न केवल अपने प्राचीन धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां साहसिक और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम भी देखने को मिलता है। ऐतिहासिक विरासत, शांत वातावरण और स्थानीय संस्कृति को अपनी ओर खींचती है। भीनमाल में पिरामिडों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रीय साहसिक स्थलों के लिए भी उपयुक्त माने जा रहे हैं। हाल के वर्षों में यहां पर्यटन सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
जालोर जिले के भीनमाल में स्थित क्षेमंकरी माता मंदिर एक प्राचीन और ऐतिहासिक सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध है, जिसकी स्थापना करीब 1000 से 1500 वर्ष पुरानी मानी जाती है। मंदिर से प्राप्त अभिलेख इसका निर्माण विक्रम संवत 682 अर्थात 625 ई.पू. से किया गया है, जो इसकी प्राचीनता का वर्णन करता है।
आज यह मंदिर श्रीमाली ब्राह्मणों सहित कई समाजों की कुलदेवी के रूप में आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है।

जालोर जिले के भीनमाल में स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर का इतिहास लगभग 1400 वर्ष पुराना माना जाता है, जो इस क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक इमारतें हैं। माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना 8वीं शताब्दी में प्रतिहार वंश के राजा नागभट्ट ने की थी। ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, विदेशी आक्रमणों की विजय के बाद इस मंदिर का निर्माण किया गया, जो काल की आस्था और शक्ति का प्रतीक है। लोकमान्यता है कि राजा नागभट्ट को सपने में भगवान शिव ने इस स्थान पर मंदिर निर्माण का संकेत दिया था।
आज यह मंदिर अपने धार्मिक महत्व, ऐतिहासिक विरासत और हाल के जीर्णोद्धार के ढांचे और मंदिरों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

भीनमाल में स्थित 72 जिनालय जैन धर्म के प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारकों में से एक प्रमुख स्थल है। यह मंदिर समूह अपनी अद्भुत स्थापत्य कला और विनिर्माण के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। सिद्धांत यह है कि प्राचीन काल में भीनमाल, जिसे श्रीमाल भी कहा जाता था, जैन संस्कृति और शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। 72 जिनालय समान समृद्ध विरासत का प्रतीक है, जहां बड़ी संख्या में अद्भुत दर्शन के लिए पुतले हैं। आज यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन और इतिहास प्रेमियों के लिए भी खास आकर्षण का केंद्र बना है।
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जालोर जिले में अरावली की ऊंची पहाड़ियों पर लगभग 900 मीटर पुराना सुंधा माता मंदिर स्थित है, जो समुद्र तल से करीब 1220 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर का निर्माण संवत 1319 में जालोर के शासक चाचिगदेव द्वारा किया गया माना जाता है और यह सफेद संगमरमर से निर्मित है। यहां अघटेश्वरी चामुंडा माता के मस्तक की पूजा की जाती है, जिससे इसकी धार्मिक मान्यता और भी विशेष होती है। मंदिर में मिले चित्र चौहानों की विजय और परमारों के इतिहास की जानकारी देते हैं। करीब 900 झीलें और राजस्थान के पहले रोपवे की सुविधा के साथ यह स्थल आस्था के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र बना है।

भीनमाल के निकट सुंधा पर्वत श्रृंखला में खोड़ेश्वर महादेव मंदिर एक प्राचीन और प्राकृतिक रूप से समृद्ध तीर्थ स्थल है। यह मंदिर गुफा के अंदर स्थित है और इसके आसपास के ऊँचे पत्थर से लेकर झरने तक का पानी यहां के मुख्य आकर्षण हैं। बारिश के मौसम में बहते ‘रेत के झरने’ को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। सुंधा माता मंदिर से लगभग 12 किमी दूर स्थित यह स्थान अध्यात्म और प्रकृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है, प्रकृति प्रेमियों के साथ-साथ यह स्थान एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन गया है।

भीनमाल के पास स्थित पंचारी के धोरे जालोर जिले से तेजी से उभरता हुआ रेगिस्तानी पर्यटन स्थल बनता जा रहा है। यह स्थान आपके पुराने जमाने की रेत के टीलों के कारण, जैसा अनुभव देता है, उसे ‘मिनी सम’ भी कहा जाता है। यहां पर्यटक आकर्षण, जिप्सी राइड और डेजर्ट बाइकिंग का रोमांचक अनुभव लेते हैं। रेगिस्तानी समुद्री तूफ़ान और रात के कैंप फ़ायर की सुविधा इसका और ख़ास उद्देश्य है। सुंदा माता मंदिर के बंद होने के कारण यहां आने वाले राक्षस भी इस प्राकृतिक प्राकृतिक का आनंद उठाते हैं।

जालोर जिले में प्रसिद्ध स्मारकपुरा के नाम से प्रसिद्ध प्राचीन जागीरदारी इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र है। इसका पुराना नाम अणुओंमना या लोयनागढ़ था, जो चारों ओर से घिरा हुआ एक छोटा सा राज्य माना जाता था। देवल प्रतिहार राजवंश ने 52 वर्ष के आसपास यहां अपनी राजधानी स्थापित की थी। इतिहास में इस स्थान का संबंध अलाउद्दीन खिलजी के खिलाफ संघर्ष और डायनासोर प्रताप के समय से भी जुड़ा हुआ है। आज यह स्थल अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक प्रकृति के कारण ‘मिनी माउंट’ के रूप में पर्यटन का आकर्षण बना हुआ है।

भीनमाल शहर में स्थित चंडीश्वर महादेव मंदिर (चंडीनाथ महादेव) लगभग 7वीं सदी का प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर माना जाता है। यह मंदिर भूमि से करीब 20 फीट नीचे स्थित है, जहां गर्भगृह में प्राचीन मूर्तियां हैं, दर्शन के लिए आश्रम से नीचे उतरना है, जो इसे बनाना आसान बनाता है। सावन माह में यहां सावन माह में मिट्टी के शिवलिंग बनाने की विशेष पूजा की जाती है। अपनी अनोखी संरचना और धार्मिक ज्योतिष के कारण यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

भीनमाल शहर में स्थित जैकब तालाब एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक जलस्रोत के रूप में जाना जाता है। स्थानीय बौद्धों के अनुसार इसका निर्माण लगभग 1369 ई.पू. में नीम गौरिया क्षेत्रपाल की मूर्ति बैठक के दौरान हुआ था। यह तालाब प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो क्षेत्र की जल परिषद को पूरा करता था। नीम गौरिया मंदिर के पास यह स्थल, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी खास महत्व रखता है, आज यह स्थान अपनी ऐतिहासिक विरासत और शांति वातावरण के कारण स्थानीय लोगों और स्थानों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

भीनमाल क्षेत्र में स्थित वकाउ थीम पार्क स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय मनोरंजन स्थल बन गया है। यह पार्क अपने रोमांचक राइड्स और विभिन्न मनोरंजक मनोरंजन के लिए जाना जाता है, जो हर उम्र के लोगों को आकर्षित करता है। करीब 4.1 की रेटिंग और 100 से अधिक रेटिंग के साथ इस क्षेत्र का प्रमुख मनोरंजन स्थान माना जाता है। सुबह से शाम तक खुला रहने वाला यह पार्क परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए उपयुक्त स्थान है। आधुनिक सुविधाओं के साथ यह पार्क भीनमाल में पर्यटन के नए आकर्षण के रूप में तेजी से उभर रहा है।



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