चाईबासा में कंप्यूटर डाटा के आधार पर चोरों ने 26 लाख का गबन किया, दर्ज हुई एफआईआर

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चाईबासा ट्रेजरी फ्रॉड: सिस्टम के अंदर ही कैश जमा करने का एक घोटाला झारखंड के चाईबासा में सामने आया है। यहां एक सिपाही ने पुलिस विभाग की ‘लेखा शाखा’ को ही अपना ‘एटीएम’ बना लिया और करीब 8 पुराने रिकॉर्ड और कंप्यूटर डेटा के साथ ऐसा खतरनाक खेल खेला कि सरकारी पैमाने से 26 लाख रुपये गायब हो गए। इस मामले में अब आप सभी के साथ ही हाई लेवल इन्वेस्टिगेशन टीम की एंट्री हो गई है।

ज़ूम

चाईबासा ट्रेजरी घोटाले केश में सिपाही देवनारायण मुर्मू के खिलाफ दर्ज

पश्चिमी सिंहभूम. झारखंड के चाईबासा में खाकी को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। असल में, जिसकी खाकी पर सुरक्षा की ज़िम्मेदारी थी, उसी के एक सिपाही ने विश्वास को ख़त्म कर दिया। अब जब चाईबासा कोशागार (चाईबासा कोषागार) के इस महाघोटाले की परतें खुली हैं, तो चाईबासा कोषागार (चाईबासा कोषागार) के इस महाघोटाले की परतें खुली हैं, तो चाईबासा कोषागार (चाईबासा कोषागार) के इस महाघोटाले की परतें खुली हैं, तो चाईबासा कोषागार (चाईबासा कोषागार) के इस महाघोटाले की परतें खुली हैं, तो चाईबासा से लेकर प्रशासन तक का संकट खड़ा हो गया है। यहां जिला पुलिस विभाग के कब्जे से लाखों रुपये की अवैध संपत्ति बरामद की गई है। चाईबासा ट्रेजरी से हुई इस धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड कोई बाहरी अपराधी नहीं है, बल्कि पुलिस विभाग का ही एक सिपाही निकला है। बिल्डर्स ने कंप्यूटर डेटा के साथ स्टॉक कर और अभिलेखों में जालसाजी कर सरकारी रेटिंग को स्थापित किया है। आरोप के अनुसार, एसपी कार्यालय के लेखा शाखा में नवीन निवास के पद पर सितंबर 2017 से मई 2025 के बीच सरकारी अभिलेखों में जालसाजी कर और कंप्यूटर के डेटा में अन्य खाता धारकों के रिकार्ड से यह अवैध रूप से सूचीबद्ध किया गया। अब इस मामले में अवैध संपत्ति और अन्य खाताधारकों के खाते दर्ज किए गए हैं। बता दें कि इस मामले में जिला प्रशासन द्वारा साकेत उच्च पद पर आसीन पॉलिटेक्निक टीम द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है.

ट्रेजरी यूनिट ने एफआईआर दर्ज कराई

इस केस का खुलासा चाईबासा कोशागार के आरोपी समित कुमार ने मुफ्फसिल थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराने के बाद किया है। पुलिस ने मुख्य नगरपालिका सिपाही देव नारायण मुर्मू के खिलाफ और उसके साथ लाइसेंस बनाने वाले अन्य खाताधारकों के दस्तावेज दर्ज कर ली है। आरोप है कि इन लोगों ने मिलकर कुल 26 लाख 21 हजार 717 रुपये की सरकारी राशि का गबन किया है.

8 प्राचीनतम तक रहने वाले फ़र्ज़ीवाड़े का खेल

मामले की जांच में यह सॉफ्टवेयर्स वाली सामने आई है कि यह फर्जीवाड़े की बात एक-दो दिन का काम नहीं थी। आधारभूत सिपाही देवनारायण मुर्मू जब एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में स्थापित थे, तब उन्होंने इस अकादमी की नींव रखी थी। सितंबर 2017 से लेकर मई 2025 तक, यानी लगभग 8 साल तक वह लगातार कंप्यूटर डेटा में बदलाव कर अवैध रूप से पैसे निकालता रहा। वह बेहद अचूक तरीके से सरकारी वेबसाइट पर हेराफेरी की ताकि किसी को शक न हो।

बनी उच्च वैज्ञानिक टीम की जांच के लिए

जिला प्रशासन ने इस मामले को देखते हुए एक उच्च वैज्ञानिक जांच टीम का गठन किया है। यह टीम इस बात का आकलन कर रही है कि 8 साल तक इतना बड़ा गैबॉन कैसे बना और विभाग के बड़े अधिकारियों को इसका बजट क्यों नहीं लगा। जांच टीम से यह भी पता चला है कि इस खेल में सिपाहियों के साथ कौन-कौन से कर्मचारी या बाहरी लोग शामिल थे।

जर्जर विद्यालय की वर्तमान स्थिति

मुख्य बुनियादी ढांचा देवनारायण मुर्मू वर्तमान में पश्चिमी सिंहभूम जिले के ही सेरेंगदा थाने में पदस्थापित है। एसपी ऑफिस से इंडिपेंडेंट के बाद भी उनके गैजेट्स को दबाया जा रहा है, जो अब तक उपकरण और ट्रेजरी के मिलान के दौरान पकड़ में आ गया है। मुफ्फसिल थाना पुलिस ने अब अमूर्त सिपाही के अपराधी और गैबन की जेल से बरामदगी पर कानूनी कार्रवाई की है।

लेखक के बारे में

ऑथरीमजी

विजय झा

पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्ष से रेलवे. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का दायरा। नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमारा टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिटल…और पढ़ें

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