World Tribal Day: आदिवासी युवाओं का उभरता हुआ सितारा

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World Tribal Day: सरायकेला-खरसावां जिले के आदिवासी समुदाय के युवा आज अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। इनकी सफलता की कहानियां न सिर्फ समाज को प्रेरणा दे रही हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इनमें से एक युवा की तारीफ कर चुके हैं। ये युवा अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से न सिर्फ खुद को स्थापित कर रहे हैं, बल्कि समाज के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहे हैं।

World Tribal Day: माउंटेन बाइकर गर्ल: कंचन उगुरसांडी की अद्भुत यात्रा

कुचाई प्रखंड के बिदरी गांव की कंचन उगुरसांडी का नाम आज देशभर में माउंटेन बाइकर गर्ल के रूप में जाना जाता है। हो आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली कंचन ने अपनी बाइकिंग यात्रा से न सिर्फ क्षेत्रीय, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई है। कंचन ने देश के सबसे ऊंचे 18 दर्रों को पार करके यह साबित कर दिया कि जब हौसले बुलंद हों, तो कोई भी सपना पूरा हो सकता है।

कंचन ने जून 2021 में अपनी बाइक से डेढ़ महीने की यात्रा कर देश की सबसे ऊंची सड़क, लद्दाख के उमलिंग ला दर्रे तक पहुंचने का साहसिक कार्य किया। इस दर्रे पर राष्ट्रध्वज फहराकर कंचन 19,300 फीट की ऊंचाई पर बाइक से पहुंचने वाली पहली महिला बाइकर बनीं। उन्होंने हिमालय की खतरनाक पहाड़ियों को पार करते हुए 3,187 किलोमीटर की दूरी तय की। अब कंचन दिल्ली से सिंगापुर तक का सफर बाइक से करने की तैयारी में हैं।

World Tribal Day: तीरंदाजी के प्रशिक्षक: प्रेमचंद मार्डी का योगदान

World Tribal Day: सरायकेला के कांड्रा पिंड्राबेडा गांव के प्रेमचंद मार्डी पिछले 30 वर्षों से निशुल्क तीरंदाजी का प्रशिक्षण दे रहे हैं। सिदो-कान्हू आर्चरी ट्रेनिंग सेंटर के कोच प्रेमचंद ने अब तक 150 से अधिक युवाओं को तीरंदाजी के गुर सिखाए हैं। उनके प्रशिक्षण में प्रशिक्षित चार तीरंदाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और 53 राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके हैं।

प्रेमचंद का मानना है कि आदिवासी समुदाय में पारंपरिक तीरंदाजी की क्षमता स्वाभाविक रूप से मौजूद रहती है, बस उन्हें सही दिशा और प्रशिक्षण की जरूरत होती है। उन्होंने अपने आर्चरी एकेडमी से 21 तीरंदाजों को सरकारी नौकरी दिलाने में भी मदद की है। प्रेमचंद का सपना है कि वे बड़े पैमाने पर तीरंदाजी ट्रेनिंग सेंटर खोलें, जिससे अधिक से अधिक आदिवासी युवा इस खेल में अपने भविष्य को संवार सकें।

World Tribal Day: आदिवासी युवाओं के सपनों की उड़ान

इन युवाओं की सफलता की कहानियां यह साबित करती हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और मेहनत की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। सरायकेला के ये युवा न सिर्फ अपने क्षेत्र में, बल्कि पूरे देश में आदिवासी समुदाय के गर्व का प्रतीक बन गए हैं। वे अपनी मेहनत और संकल्प से यह दिखा रहे हैं कि आदिवासी समुदाय भी किसी से कम नहीं है, बस उन्हें सही दिशा और अवसर की आवश्यकता है।

निष्कर्ष

World Tribal Day: सरायकेला-खरसावां जिले के ये आदिवासी युवा खेल और कला के क्षेत्र में अपनी कड़ी मेहनत और लगन से नये मानक स्थापित कर रहे हैं। उनकी उपलब्धियां न केवल आदिवासी समुदाय के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई सराहना से इन युवाओं का हौसला और भी बढ़ा है। ये युवा अब समाज के अन्य युवाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जिससे वे भी अपने सपनों को साकार कर सकें।

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